धर्मगुरु मौलाना अरशद मदनी बोले-मरना मंजूर लेकिन वंदे मातरम् नहीं बोलेंगे
शब्द अग्नि नई दिल्ली। जमीयत उलेमा- ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि मरना मंजूर है लेकिन वंदे मातरम् नहीं बोलेंगे। हमें किसी दूसरे के इस राष्ट्रगीत को पढ़ने या गाने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन मुसलमान इसे स्वीकार नहीं कर सकते मदनी का कहना है कि वंदे मातरम् गीत के कुछ हिस्से ऐसी मान्यताओं पर आधारित हैं, जो इस्लाम के खिलाफ हैं। उन्होंने दलील दी कि गीत के चार अंतरों में देश को देवतुल्य मानकर देवी से तुलना और पूजा जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है। ये मुसलमानों की बुनियादी धार्मिक मान्यता के मुताबिक नहीं है।
वतन से मोहब्बत अलग उसकी पूजा अलग
उन्होंने कहा कि वतन से मोहब्बत अलग बात है और उसकी पूजा अलग, मुसलमान सिर्फ अल्लाह की इबादत कर सकते हैं, इसलिए मर जाना मंजूर है लेकिन अल्लाह के बराबर किसी को रखना मंजूर नहीं । मदनी ने कहा कि वंदे मातरम् का अर्थ मां, मैं तेरी पूजा करता हूं। मुसलमानों की आस्था से मेल नहीं खाता । इसीलिए किसी को उसके धर्म के खिलाफ कोई नारा या गीत बोलने के लिए मजबूर नहीं किया
जा सकता।
Author: Shabd Agni
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