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May 14, 2026 7:19 am

पुरुषार्थ से ही मोक्ष सुख की प्राप्ति संभव

शब्द अग्नि / इंदौर। इस जीव ने आज तक पुरुषार्थ तो बहुत किया परन्तु वह सब पुरुषार्थ संसार परिभ्रमण का ही कारण बना क्योंकि पूरूषार्थ चार प्रकार का होता है- 1- अर्थ पुरुषार्थ, 2- लोभ पुरुषार्थ 3-धर्म पुरुषार्थ, 4- मोक्ष पुरुषार्थ। यह जीव अनादिकाल से पर में ही लगा रहा, और आज भी पर की बातें करता रहता है, इस जीव ने आज तक स्व की चिंता ही नहीं की अर्थ एवं लोभ पुरुषार्थ से यह जीव संसार परिभ्रमण करता रहेगा। धर्म एवं मोक्ष अर्थात सच्चा सुख प्राप्त करना है तो धर्म एवं मोक्ष पुरूषार्थ ही अपने जीवन में उतारने लायक है, इसके अलावा सच्चा सुख असम्भव है। उक्त उदगार महती धर्मसभा में इन्दौर की आन, बान, शान एवं इन्दौर के ही लाल अध्यात्म योगी उपाध्याय मुनि श्री महेन्द्र सागरजी म.सा. के शिष्य मनीष सागरजी म. सा. ने व्यक्त किये। उसके पूर्व महावीर बाग कालोनी, एरोड्रम रोड इन्दौर से भव्य मंगल जुलुस निकला जो कि विभिन्न कालोनियों में भ्रमण करता हुआ चिंतामणि पार्श्वनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर, महावीर बाग एरोड्रम रोड इन्दौर पर धर्मसभा में परिवर्तित हुआ। धर्मसभा का संचालन राजेन्द्र नाहर ने किया । आभार प्रदर्शन डॉ. बसन्त लुनिया ने किया। कार्यक्रम में धर्मप्रेमी समाज पधारकर जिनशासन की शोभा बढ़ावें तथा अपना जीवन सफल बनाएं। उक्त जानकारी खरतरगच्छ श्रीसंघ, इन्दौर के अध्यक्ष धर्मेन्द्र मेहता, सचिव सतीश हुडिया ने दी।

Shabd Agni
Author: Shabd Agni

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