बैंक को खाता फ्रिज करना पड़ा महंगा हाईकोर्ट ने सात दिन में खाता सामान्य करने के दिए आदेश
शब्द अग्नि /यासिर पठान/ इंदौर। आई.सी.आई.सी.आई. बैंक द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के महिला खाताधारक का बैंक खाता फ्रीज़ कर उसमें जमा राशि पर लीयन अधिरोपित करना बैंक को महंगा पड़ गया। माननीय उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश, खण्डपीठ इंदौर ने बैंक की इस कार्यवाही को अनुचित और अवैधानिक मानते हुए 7 दिनों के भीतर खाता सुचारू रूप से चालू करने तथा राशि पर लगाए गए लीयन को हटाने के सख्त निर्देश दिए हैं।
यह था मामला
मामला इंदौर निवासी वन्दना चौहान से संबंधित है। याचिकाकर्ता के बैंक खाते से जुड़ी एक शिकायत साइबर क्राइम सेल, पुलिस थाना भावनगर, गुजरात में दर्ज की गई थी। इसी शिकायत के आधार पर आई.सी.आई.सी.आई. बैंक ने बिना विधिक प्रक्रिया का पालन किए याचिकाकर्ता का बैंक खाता फ्रीज़ कर दिया तथा ₹1,17,149.23 की राशि पर लीयन अधिरोपित कर दिया पुलिस द्वारा जांच के उपरांत शिकायत को समाप्त कर दिया गया, इसके बाद भी बैंक द्वारा खाता अनफ्रीज़ नहीं किया गया। आरोप है कि याचिकाकर्ता को लगभग 30 से अधिक बार बैंक बुलाया गया, जिससे उन्हें मानसिक, आर्थिक एवं सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।
हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
इस मनमानी कार्यवाही से क्षुब्ध होकर वन्दना चौहान ने अपने अधिवक्ता शुभम मांडील के माध्यम से माननीय उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश में रिट याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने तर्क दिया कि शिकायत समाप्त हो जाने के बाद भी बैंक द्वारा खाता फ्रीज़ रखना पूर्णतः अवैधानिक है और इससे याचिकाकर्ता को गंभीर क्षति हो रही है। माननीय उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता के तर्कों से सहमत होते हुए आई.सी.आई.सी.आई. बैंक को निर्देशित किया कि वह 7 दिवस के भीतर बैंक खाता चालू करे एवं अनाधिकृत रूप से अधिरोपित लीयन को तत्काल हटाए। न्यायालय के इस आदेश को बैंकिंग संस्थानों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है कि वे खाताधारकों के अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकते।
आमजन को मिलेगी रहता
माननीय उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश, खण्डपीठ इंदौर द्वारा पारित उक्त आदेश सराहनीय है उक्त आदेश के बाद के आमजन बड़ी राहत मिलेगी लोगो को बैंक के चक्कर नहीं लगाना पड़ेंगे बैंक की मनमानी बन्द हो बैंक अधिकारियों द्वारा उक्त कृत्य किया जाता है तो माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष रिट याचिका प्रस्तुत कर राहत ली जा सकती है।

शुभम मांडील
मामले में याचिका लगाने वाले वकील
Author: Shabd Agni
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