हजारों तोतों को मिल मिल गई मोहलत
शब्द अग्नि न्यूज़ । इंदौर। रीगल तिराहे पर बन रहे मेट्रो स्टेशन के लिए पेड़ों की कटाई और हजारों पक्षियों की सुरक्षा का मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने पेड़ों की कटाई पर 16 फरवरी तक स्टे लगा दिया है। हाईकोर्ट ने प्रशासन से पूछा है कि क्या आपने वहां पर पेड़ों की कटाई की अनुमति ली है। 16 फरवरी तक प्रशासन को इस मामले में लिखित अनुमतियां पेश करना है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में प्रियांशु जैन की याचिका पर सुनवाई हुई।
इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता लवलेश सरस्वत ने पक्ष रखा। वहीं प्रतिवादी की ओर से उप महाधिवक्ता सुदीप भार्गव और अधिवक्ता विकास जायसवाल उपस्थित हुए। यह जनहित याचिका इंदौर के रानीसराय क्षेत्र (एस. पी. ऑफिस परिसर) में मेट्रो रेल ब्रिज निर्माण के उद्देश्य से लगभग 200 M अधिक पेड़ों की प्रस्तावित और जारी कटाई के विरुद्ध दायर की गई थी। याचिका में यह गंभीर चिंता जताई गई कि यदि इस कार्रवाई को तत्काल नहीं रोका गया, तो इससे पर्यावरण का अपूरणीय नुकसान होगा और शहर का पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ जाएगा। तर्क दिया गया कि यह पूरी प्रक्रिया वन संरक्षण अधिनियम 1980 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन कर बिना अनुमति के की जा रही है।
याचिकाकर्ता के वकील ने न्यायालय को अवगत कराया कि ये पेड़ हजारों तोतों का प्राकृतिक निवास स्थान हैं, जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित श्रेणी में आते हैं। सुनवाई के दौरान नगर निगम इंदौर के उद्यान अधिकारी द्वारा 9 जनवरी 2026 को जारी एक पत्र का भी हवाला दिया गया। इस पत्र में स्पष्ट किया गया था कि निगम को रानीसराय भूमि पर खड़े पेड़ों को काटने या स्थानांतरित करने के लिए कोई औपचारिक आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते याचिकाकर्ता ने जबलपुर मुख्य पीठ द्वारा नीरज गर्ग बनाम भारत संघ के मामले में 26 नवंबर 2025 को दिए गए आदेश का संदर्भ दिया।
उस आदेश में न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि राज्य में बिना संबंधित वृक्ष अधिकारी और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की समिति की अनुमति के कोई भी पेड़ काटा या प्रत्यारोपित नहीं किया जाएगा। न्यायालय ने माना कि बिना अनुमति पेड़ों की कटाई संविधान और जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं। न्यायालय ने अंतरिम राहत प्रदान करते हुए निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई की तारीख तक रानीसराय भूमि, रीगल चौराहा, इंदौर में स्थित किसी भी पेड़ को न तो काटा जाएगा और न ही वहां स्थानांतरित किया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई अब 16 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है।
Author: Shabd Agni
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