शब्द अग्नि न्यूज़ । इंदौर हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति सहकारी वित्त एवं विकास निगम के रिटायर्ड वरिष्ठ लेखाधिकारी भूपेंद्र सिंह भाटी के खिलाफ दर्ज अनुपातहीन संपत्ति के मामले में राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने 14 वर्ष पुराने इस केस में लोकायुक्त पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर को निरस्त करने से साफ मना करते हुए कहा कि जब प्रथमदृष्टया अपराध से जुड़ी सामग्री उपलब्ध हो, तब जांच और अभियोजन को प्रारंभिक स्तर पर रोका नहीं जा सकता।
जस्टिस विजयकुमार शुक्ला एवं जस्टिस आलोक अवस्थी की डबल बेंच ने आरोपी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस स्तर पर साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण संभव नहीं है।
एफआईआर निरस्तीकरण के लिए कोर्ट के अधिकारों का उपयोग केवल सीमित और असाधारण परिस्थितियों में ही किया जा सकता है। लोकायुक्त पुलिस इंदौर ने साल 2012 में आरोपी भाटी के इंदौर स्थित ठिकानों पर छापा मारकर आय से अधिक संपत्ति पकड़ी थी। उस समय आरोपी भोपाल में पदस्थ था। प्रारंभिक जांच में करीब 18.8% (लगभग 25 लाख रुपए) की अनुपातहीन संपत्ति सामने आई थी, जो बाद की जांच में 35 प्रतिशत से अधिक पाई गई। यह केस भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13 (1) (ई) एवं 13(2) के तहत दर्ज किया गया था। आरोपी की ओर से धारा 528 बीएनएसएस, 2023 के तहत याचिका दायर कर एफआईआर निरस्त करने की मांग की गई थी। आरोपी की ओर से दलील दी गई कि संपत्ति आकलन में गणना संबंधी त्रुटियां हैं, जिसमें शैक्षणिक खर्च, वेतन ऋण और पुत्र की आय को शामिल नहीं किया गया। वहीं लोकायुक्त पुलिस ने तर्क दिया कि ये सभी बिंदु ट्रायल के दौरान परीक्षण का विषय हैं। हाई कोर्ट ने लोकायुक्त के तर्क से सहमति जताई।
Author: Shabd Agni
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