शब्द अग्नि न्यूज़ । इंदौर। ममता, संस्कार और समाज सेवा की मिसाल सामने आई है। दरअसल, सुदामा नगर निवासी 79 वर्षीय संतोष वर्मा के निधन के बाद उनकी पांच बेटियों ने न केवल उनकी अर्थी को कंधा दिया, बल्कि मां की अंतिम इच्छा और उनके परोपकारी स्वभाव को देखते हुए उनकी बॉडी मेडिकल रिसर्च के लिए दान कर दी। शासन की ओर से इस काम के लिए स्व. संतोष वर्मा को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया।
बेटी मृदुला ने बताया कि हमें मां ने शुरू से ही काफी अच्छे संस्कार दिए। एक-एक कर जब पांचों बेटियों की शादी हो गई तो वह खुद ही अकेले रहती थीं और सारे काम कर लेती थीं। 10 साल से सभी बेटियों ने उन्हें अलग-अलग दौर में अपने साथ रखा और खूब सेवा की। कुछ साल से वह पूरी तरह व्हीलचेयर पर ही थीं। आखिरी समय में वह बड़ी बेटी कुमुदिनी के पास थीं। इस दौरान भी सभी बेटियों ने वहां जाकर उनकी सेवा की। एक हफ्ते से वह बीमार थीं। सोमवार को उनके निधन के बाद सभी बहनों ने आपसी सहमति से उनकी आंखें, त्वचा और देह दान करने का निर्णय लिया।
यह अवसर समाज को एक संदेश दे गया कि मृत्यु के बाद भी जीवन को अर्थपूर्ण बनाया जा सकता है। इस मार्मिक क्षण में पांचों बेटियों ने अपनी मां की अर्थी को कंधा दिया। अंत्येष्टि क्रिया गायत्री परिवार की परंपरा अनुसार प्रतीकात्मक रूप से हवन और मंत्रोच्चार के माध्यम से की गई। सोमवार को जब संतोष वर्मा ने अंतिम सांस ली तो पांचों बहनों ने आपसी सहमति से एक बड़ा निर्णय लिया। इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के माध्यम से उनकी आंखें दान की गई, जिससे दो अंधे व्यक्तियों की जिंदगी में उजाला हो सकेगा। उनकी त्वचा (स्किन) भी डोनेट की गई, जो किसी गंभीर रूप से झुलसे व्यक्ति के काम आएगी। अंत में उनकी देह को मेडिकल रिसर्च सेंटर को सौंप दिया गया, ताकि भावी डॉक्टर्स चिकित्सा के गुर सीख सकें।
Author: Shabd Agni
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