शब्द अग्नि न्यूज़ ।इंदौर। दूषित पानी पीने से बुधवार देर रात 25वीं मौत हो गई। इस बीच शहर में इंदौर नगर निगम की घोर लापरवाही एक बार फिर उजागर हो गई है। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे जोन क्रमांक-20 में बीएसएफ के सामने पानी और ड्रेनेज लाइन के लीकेज सुधार कार्य के दौरान निगम अधिकारियों ने मानवीय सुरक्षा को पूरी तरह ताक पर रख दिया।
घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और निगम कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। दोषी इंजीनियरों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस गड्ढे में कई दिनों से गंदा और दूषित पानी भरा हुआ था, उसी में निगमकर्मी को बिना किसी सुरक्षा उपकरण, मास्क, दस्ताने या सेफ्टी किट के उतार दिया गया। मौके पर ना गैस लीकेज चेकिंग हुई, ना किसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था की गई। यदि गड्ढा धंस जाता, जहरीली गैस निकलती या कर्मचारी फिसलता तो सीधा मीत का खतरा था। बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारी तमाशबीन बने रहे। यह घटना साफ दिखाती है कि नगर निगम कर्मचारियों की जान की कीमत अधिकारियों के लिए कुछ भी नहीं है।
ड्रेनेज और सीवर से जुड़े कार्यों में सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है, लेकिन यहां हर नियम को रौंद दिया गया। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे- सीधे कर्मचारियों की जान से खिलवाड़ है। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मीतों का सिलसिला जारी है। अब तक 25 मौत हो चुकी है। अभी 38 मरीज एडमिट हैं, जिनमें से 10 आईसीयू में हैं। इनमें भी तीन वेंटिलेटर पर हैं। लगातार हो रही मौतों को लेकर अभी भी क्षेत्र में दहशत है।
Author: Shabd Agni
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