हमारी संस्कृति में पुरातन काल से ही नारी को पूज्नीय और आदर भाव दिया जाता रहा है : पं. नागरजी
शब्द अग्नि न्यूज़ । इंदौर। हमारी संस्कृति मे नारी शक्ति की महिमा का वर्णन ओर प्राथमिकता शुरू से हि किया गया है, नारी के सत को कभी प्रभावित नहीं होने देना चाहिए। हमारे धर्म ग्रंथो में नारी को प्राथमिकता है और पूजनीय भी बताया गया है पाश्चात्य संस्कृति आज महिला दिवस मना रही है हमारी संस्कृति में शुरू से ही नारी की महत्ता पहले पायदान पर रही है।
यह विचार श्रीमद् भागवत कथा में गोवर्धन गौशाला पर परमपुर कमल किशोर जी नगर महाराज जी रविवार को व्यक्त किए. प्रमुख रूप से महेंद्र पटेल यशवंत पटेल सरदार सिंह सोलंकी राधेश्याम पटेल विनोद सोलंकी संतोष निमचा उपस्थित रहे. गोवर्धन गौ शाला में दो लाख स्क्वायर फीट के पंडाल के अलावा कितनी ही संख्या में पंडाल के बाहर भी कदम के पेड़ो की छाव के बीच श्रद्धालु कथा का श्रवण कर रहे हैं।
पं. नागरजी ने यह भी कहा कि नर को कभी नारी की निंदा नहीं करनी चाहिए और महिला दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज भी कितनी भी बड़ी लाइन हो महिला को फट से टिकट मिल जाता है। उन्होंने कहा, “राम से सीता अलग ना होती तो रावण को कौन मारता ? रत्ना सी नारी ना होती तो तुलसी राम को पाता ? सावित्री ना ज्योति तो सत्यवान के प्राण कौन बचाता ? नारी अगर प्रसव पीड़ा ना सहती तो नर नारी को माँ नहीं कहता। पं. नागरजी ने यह भी कहा कि नर को कभी नारी की निंदा नहीं करनी चाहिए और महिला दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज भी कितनी भी बड़ी लाइन हो महिला को फट से टिकट मिल जाता है ।
Author: Shabd Agni
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