VISITORS

0 0 6 0 4 5

February 11, 2026 2:54 pm

+91 8878812345

Explore

Search

February 11, 2026 2:54 pm

वाराणसी में देवी अहिल्या की विरासत जमींदोज

… इंदौर में नाराजगी

शब्द अग्नि / इंदौर। 254 साल पहले 1771 में देवी अहिल्या द्वारा वाराणसी में निर्मित मणिकर्णिका घाट के एक हिस्से को जमींदोज कर दिया गया है। यहां श्मशान घाट बनाए जाने के प्रोजेक्ट के चलते इसे तोड़ा गया है। इसे लेकर देवी अहिल्या के वंशज और समाज के लोगों में नाराजगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी क्षेत्र से सांसद हैं और उन्होंने 2023 में इसका भूमिपूजन किया था। यहां 18 करोड़ रुपए से विकास कार्य किये जाना है।
यहां 29350 वर्ग मीटर एरिया में काम कराया जाना है। यहां मिट्टी दलदली है, इसलिए 15 से 20 मीटर नीचे तक पाइलिंग कराई गई है। सख्त मिट्टी तक पाइलिंग का काम किया गया है। ताकि 223 बाढ़ में यहां के निर्माण को किसी भी तरह की दिक्कत न हो। दरअसल इस घाट की निगरानी देवी अहिल्या की संपत्तियों की देखरेख के लिए बने खासगी देवी अहिल्या होलकर चैरिटीज ट्रस्ट द्वारा किया जाती है। इसके अध्यक्ष यशवंतराव होलकर हैं। उन्होंने इस मामले में बयान जारी कर कहा कि विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन देवी अहिल्याबाई होलकर की दूरदर्शिता और विरासत को सुरक्षित रखते हुए ही होने चाहिए थे।

हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लापरवाही की जांच, दोषियों पर कार्रवाई, मूर्तियां ट्रस्ट को सौंपने और उनके पुनः प्रतिष्ठापन का आग्रह किया है ढाई सौ वर्ष से ज्यादा प्राचीन मणिकर्णिका घाट काशी के 84 प्रमुख घाटों में शामिल है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी स्थान पर माता पार्वती की कणिका (कान की मणि) गिरी थी, जिससे इसका नाम मणिकर्णिका पड़ा। घाट पारंपरिक पत्थर की सीढ़ियां, धार्मिक प्रतीक व शिल्पकला के अवशेष मौजूद हैं। देवी अहिल्या ने यहां तीर्थ यात्रियों के लिए कई सुविधाएं विकसित कराई हैं। वाराणसी प्रशासन की इस कार्रवाई को लेकर इंदौर में आक्रोश है। विरोध में धनगर समाज, पाल, बघेल समेत कई समाजों ने 15 जनवरी को बैठक प्रस्तावित है। इसमें रणनीति तय की जाएगी। समाज का कहना है कि अहिल्याबाई होलकर के त्रिशताब्दी वर्ष के समापन पर उनकी विरासत का ऐसा अनादर आहत करने वाला है।

Shabd Agni
Author: Shabd Agni

.

विज्ञापन
लाइव क्रिकेट स्कोर