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गुजरात-घर पर नही जलता चूल्हा,कहां खाते हैं खाना

इस गांव में लोगों के घर पर नहीं जलता कभी चूल्हा, आखिर 500 लोग कहां खाते हैं खाना ?

शब्द अग्नि / अनस खान / गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित चंदनकी गांव एक अनोखी मिसाल पेश करता है, जहां किसी भी घर में खाना नहीं बनता. यहां रहने वाले करीब 500 लोग रोजाना एक ही जगह पर, सामुदायिक रसोई में बना भोजन करते हैं.
हमारा देश भारत विविधताओं से भरा है  और हर जगह की अपनी एक अनोखी कहानी है गुजरात में एक ऐसा ही हैरान कर देने वाला गांव है मेहसाणा जिले का चंदनकी. यहां की परंपरा सुनकर आप दंग रह जाएंगे, क्योंकि इस गांव में किसी भी घर में रसोई नहीं है और न ही लोग अपने घर में खाना बनाते हैं. यह कोई मजाक नहीं, बल्कि सच है यहां रहने वाले 500 लोग रोजाना एक साथ, एक ही जगह पर सामुदायिक रसोई में बना खाना खाते हैं यह परंपरा न सिर्फ खाना बनाने के बोझ को कम करती है बल्कि पूरे गांव में एकता और भाईचारे को भी बनाए रखती है आइए जानते हैं, इस ‘किचन फ्री’ गांव की पूरी कहानी.

क्यों नहीं जलते घरों में चूल्हे?

चंदनकी गांव के लोगों ने मिलकर यह नियम इसलिए बनाया, क्योंकि यहां की ज्यादातर आबादी बुजुर्गों की है. गांव के युवा नौकरी या कारोबार के लिए शहरों और विदेशों में जा चुके हैं. ऐसे में पीछे रह गए बुजुर्गों के लिए रोजाना अलग-अलग घरों में खाना बनाना एक बड़ी मुश्किल बन गया था. ऐसा कहा जाता है कि इस परेशानी को दूर करने के लिए, गांव के लोगों ने सामूहिक रूप से एक फैसला लिया कि क्यों न सब मिलकर एक जगह खाना बनाएं और साथ में खाएं? जो शुरुआत में एक जरूरत थी, आज वो इस पूरे गांव की पहचान बन चुकी है.

 

Shabd Agni
Author: Shabd Agni

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