रिपोर्ट पर गंभीर चिंता जताते हुए उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए
शब्द अग्नि न्यूज़ । इंदौर। भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर मंगलवार (27 जनवरी) को हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की पीठ ने प्रस्तुत रिपोर्ट पर गंभीर चिंता जताते हुए उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि रिपोर्ट की विश्वसनीयता सिद्ध करने के लिए अधिक उपयुक्त, ठोस और प्रामाणिक दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएं।
न्यायमूर्ति शुक्ला ने अंतरिम राहत के स्वरूप पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने सवाल उठाया कि समिति अपने सुझावों का प्रभावी और निष्पक्ष क्रियान्वयन किस प्रकार सुनिश्चित करेगी। पीठ ने क्षेत्र में लगातार हो रही मौतों और उनके कारणों की अनिश्चितता को अत्यंत चिंताजनक बताया। कोर्ट ने रिपोर्ट में प्रयुक्त “वर्बल ऑटोप्सी” शब्द पर आपत्ति जताते हुए उसकी चिकित्सकीय, वैज्ञानिक और विधिक विश्वसनीयता पर प्रश्न उठाए । अदालत ने यह भी पाया कि रिपोर्ट में मीतों के कारण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं हैं और उसमें पर्याप्त तर्क एवं सहायक सामग्री का अभाव है। हाईकोर्ट ने रिपोर्ट को अस्पष्ट बताते हुए उसे मात्र एक “आई वॉश ” करार दिया। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला ने नगर निगम को निर्देशित किया कि वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा सुझाए गए परीक्षणों पर गंभीरता से विचार किया जाए और न्यायालय द्वारा उठाई गई सभी चिंताओं का स्पष्ट एवं ठोस उत्तर प्रस्तुत किया जाए। इसके अलावा, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने न्यायालय परिसर में स्वच्छता और जल की स्थिति का भी संज्ञान लिया और संबंधित अधिकारियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
Author: Shabd Agni
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