रोज संचालन का खर्च 8 लाख और कमाई महज, 15 हजार रुपए
शब्द अग्नि न्यूज़ । भोपाल। राजधानी में बड़े ताम-झाम के साथ शुरू हुई मेट्रो रेल सेवा फिलहाल सरकारी खजाने पर भारी पड़ती नजर आ रही है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, व्यावसायिक संचालन के पहले एक महीने में भोपाल मेट्रो को भारी आर्थिक घाटे का सामना करना पड़ा है। सुभाष नगर से एम्स तक के 7 किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो चलाने में रोजाना लगभग 8 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं, जबकि यात्रियों से होने वाली आय महज 15 हजार रुपये प्रतिदिन के करीब सिमट गई है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, 21 दिसंबर से शुरू हुए कमर्शियल रन के पहले महीने में परिचालन पर करीब ढाई करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इसके मुकाबले मेट्रो की झोली में टिकटों की बिक्री से केवल 4.50 से 5 लाख रुपए ही आए हैं। शुरुआत में जहां सात हजार लोग रोजाना सफर कर रहे थे, वहीं अब यह संख्या गिरकर 300 से 350 यात्री प्रतिदिन रह गई है। यात्रियों की कमी के चलते मेट्रो प्रबंधन को फेरों की संख्या 17 से घटाकर 13 करनी पड़ी है।
भोपाल मेट्रो के इस 7 किलोमीटर के हिस्से पर अब तक 2,225 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मेट्रो को ‘एंड-टू-एंड’ कनेक्टिविटी नहीं मिलेगी, तब तक यात्रियों का आंकड़ा बढ़ना मुश्किल है। दिल्ली मेट्रो की तर्ज पर विज्ञापन और पार्किंग जैसे वैकल्पिक आय के स्रोत भी अब तक विकसित नहीं हो पाए हैं, हालांकि इनके लिए निविदाएं जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार मार्च महीने तक सिग्नलिंग का काम पूरा होने के बाद ट्रिप्स की संख्या बढ़ाई जा सकती है। एंड-टू-एंड कनेक्टिविटी मिलने के बाद ही राजस्व में वास्तविक वृद्धि की उम्मीद है। हालांकि वर्तमान में कम आय के बावजूद मेट्रो का संचालन जारी रखना प्रबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
Author: Shabd Agni
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