शब्द अग्नि न्यूज़ / इंदौर। दौर
हाई कोर्ट की फटकार के बाद भी नींद में सोया नगर निगम
इंदौर के बीआरटीएस कॉरिडोर को हटाने पर हाईकोर्ट ने 15 दिन की सख्त डेडलाइन दी, लेकिन नगर निगम की रफ्तार इतनी सुस्त है कि अब तक सिर्फ 300 मीटर हिस्सा पूरी तरह हटाया जा सका है जिस कंपनी को बीआरटीएस तोड़ने का ठेका मिला है, उसने काम कबाड़ी को दे दिया। नतीजा ये कि उसके पास न संसाधन हैं, न मशीनें, न टाइमलाइन और शहर हर दिन जाम में फंसा रहता है।
निगम ने बीआरटीएस हटाने का ठेका राजगढ़ के ठेकेदार दिनेश यादव को दिया है। वह काम शुरू करने से पीछे हट
गया। समझाया तो उसने इंदौर के एक सहयोगी के हवाले कर दिया। बात यही नहीं रुकी. सहयोगी ने इसे आगे कबाड़ी को आउटसोर्स कर दिया। अब
हालत यह है कि 19 बस स्टॉप में से सिर्फ एक आधा टूटा, बाकी को छूना भी मुश्किल हो रहा है। एक बस स्टॉप तोड़ने में 4-5 दिन लग रहे हैं। शिवाजी वाटिका
से देवास नाका तक लगभग 7 किमी का हिस्सा अब भी जस का तस खड़ा है। यहीं पलासिया, गीता भवन, एलआईजी, रसीमा, विजयनगर और सत्य साई जैसे चौराहे है, जहाँ रोज 3 लाख से ज्यादा वाहन जाम में फंसते है। जीपीओ चीराहे से भाजपा कार्यालय तक का बीआरटीएस हिस्सा पूरी तरह तोड़ा जा चुका है। यहां टेम्परेरी पैरिकेड भी लगा दिए गए हैं। राजीव गांधी चौराहे से भंवरकुआं, नीलखा, इंदिरा प्रतिमा और जीपीओ तक की एक साइड की रेलिंग हटाई जा चुकी है। लेकिन बीच के बस स्टॉप अभी नहीं तोड़े गए हैं। दूसरी साइड की रेलिंग हटाने का काम 20 दिन बाद शुरू होने की संभावना है।
Author: Shabd Agni
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