प्रदेश में 13 दिसम्बर को लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने समस्त आयुक्त नगरपालिक निगम और समस्त मुख्य नगरपालिका अधिकारी, नगरपालिका परिषद और नगर परिषद के प्रमुख अधिकारियों को पत्र लिखकर लोक अदालत में अधिक से अधिक लंबित प्रकरणों का निराकरण किये जाने के निर्देश जारी किये हैं।
लोक अदालत क्या होती है और किन मामलों का करती है निपटारा,
लोक अदालत में मुख्य रूप से समझौता योग्य आपराधिक मामले (जैसे हल्के ट्रैफिक चालान, चेक बाउंस), सिविल मामले (जैसे भूमि, संपत्ति, पारिवारिक विवाद), बैंक वसूली, और मोटर वाहन दुर्घटना दावे (MACT) आदि निपटाए जाते हैं, जिनका उद्देश्य आपसी सहमति से जल्दी और सस्ते में न्याय दिलाना है, जबकि हत्या, डकैती जैसे गंभीर और गैर-समझौता योग्य मामलों की सुनवाई नहीं होती है.
लोक अदालत में निपटाए जाने वाले प्रमुख मामले:
- ट्रैफिक चालान: हल्के उल्लंघन जैसे बिना हेलमेट, सीट बेल्ट, गलत पार्किंग, हल्की ओवरस्पीडिंग के चालान.
- पारिवारिक विवाद: तलाक, भरण-पोषण, बच्चों की कस्टडी से जुड़े मामले.
- भूमि विवाद: संपत्ति के बंटवारे, अधिग्रहण से संबंधित मामले.
- बैंक वसूली: लोन रिकवरी से जुड़े मामले.
- मोटर वाहन दुर्घटना दावे (MACT): दुर्घटनाओं से जुड़े मुआवजे के मामले.
- श्रम विवाद: कर्मचारियों और मालिकों के बीच के विवाद.
- बिजली बिल विवाद: बिजली कंपनियों से जुड़े मामले.
- उपभोक्ता शिकायतें: ग्राहकों की शिकायतें.
- चेक बाउंस (Negotiable Instruments Act): चेक बाउंस से जुड़े मामले.
लोक अदालत में कौन से मामले नहीं निपटाए जाते (गैर-समझौता योग्य)
- हत्या, बलात्कार, डकैती जैसे गंभीर अपराध (गैर-समझौता योग्य अपराध).
मुख्य उद्देश्य:
- मामलों का सुलह-समझौते (compromise) के आधार पर निपटारा करना
- न्याय प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाना.
- अदालतों का बोझ कम करना.
Author: Shabd Agni
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