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February 12, 2026 1:57 am

मोदी सरकार चुनाव बाद भेदभाव नहीं करती-सीएम

मोहन यादव बोले- तेलंगाना सीएम और हम एबीवीपी के साथी
शब्द अग्नि / भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार चुनाव के बाद राज्यों के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं करती। तेलंगाना इसका बड़ा उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी भी मौजूद थे। बातचीत में रेवंत रेड्डी ने खुद माना कि केंद्र सरकार से उन्हें सबसे ज्यादा सहयोग मिल रहा है।
सीएम हाउस में प्रगति पोर्टल और सीपीग्राम पोर्टल की जानकारी देने आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. यादव ने कहा कि रेवंत रेड्डी और वे दोनों छात्र जीवन में एबीवीपी से जुड़े रहे हैं। आज वे कांग्रेस में हैं, लेकिन काम की प्रक्रिया और योजनाओं को लेकर मोदी सरकार के साथ कोई अड़चन नहीं आती। उन्होंने तेलंगाना- आंध्र प्रदेश के बंटवारे का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे आंध्र प्रदेश को अमरावती में नया इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने का मौका मिला, उसी तर्ज पर तेलंगाना में हैदराबाद के आसपास 30 हजार एकड़ का बड़ा विकास प्लान केंद्र सरकार की मदद से आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे यह साफ होता है कि सरकार बनने के बाद सभी राज्य एक समान हैं, देश एक है और बड़े मन से विकास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्रीय विकास के मामलों में केंद्र और राज्य मिलकर काम करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। एक समय ऐसा माहौल बनाया गया था कि पश्चिमी देश ही आधुनिक हैं और केवल वही आगे बढ़ सकते हैं, जबकि भारत जैसे देशों के लिए विकास संभव नहीं है।

लेकिन भारत ने इस धारणा को तोड़ दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि धीरे-धीरे देश की राजनीतिक व्यवस्था में क्षरण हुआ और एक-दो दलों की सरकारों की जगह 20-24 दलों की संयुक्त सरकारें बनने लगीं। इसका दुष्परिणाम देश को भुगतना पड़ा। सीएम ने कहा कि पहले हालात ऐसे रहे थे कि किसी राज्य में एक-दो रेल चलती थीं, तो राज्य रेल मंत्रालय पाने की होड़ में लग जाते थे। चाहे बिहार हो या पश्चिम बंगाल, सोच यह होती थी कि रेल मंत्रालय मिल जाए तो एक-दो नहीं, सौ रेलें चलवा लेंगे।

डॉ. यादव ने कहा कि बदलते दौर में यह सोच पूरी तरह बदल चुकी है। अब रेल मंत्रालय मांगने की राजनीति नहीं होती, बल्कि रेल बजट को मुख्य बजट में शामिल कर दिया गया है। यह अंग्रेजों की बनाई हुई व्यवस्था का अंत है। अंग्रेजों ने अपने हित में रेल व्यवस्था शुरू की थी और उस पर पूरा नियंत्रण अपने हाथ में रखा था। उस समय राज्यों के बजट से रेल का खर्च निकलवाया जाता था, लेकिन परिवहन से मिलने वाला पूरा लाभ अंग्रेज अपने पास रखते थे।

Shabd Agni
Author: Shabd Agni

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