पुस्तक तभी प्रकाशित मानी जाती है, जब …
शब्द अग्नि न्यूज़ । नई दिल्ली। पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे की आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बी प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने 24 घंटे के अंदर दूसरी बार सफाई पेश की है। नए स्पष्टीकरण में प्रकाशक ने साफ शब्दों में कहा है कि किसी पुस्तक को तब तक ‘प्रकाशित’ नहीं माना जा सकता, जब तक वह सभी खुदरा माध्यमों पर बिक्री के लिए उपलब्ध न हो। मंगलवार को जारी अपने नए स्पष्टीकरण में पेंगुइन ने कहा कि घोषित शीर्षक, प्री-ऑर्डर लिस्टिंग और वास्तविक प्रकाशन- ये तीन अलग-अलग चरण होते हैं। केवल प्री-ऑर्डर लिंक उपलब्ध होने का अर्थ यह नहीं है कि पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है।
यह नया स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रकाशक के रुख पर सवाल उठाते हुए कथित विरोधाभास की ओर इशारा किया था। राहुल गांधी ने जनरल नरवणे के वर्ष 2023 के एक सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला दिया, जिसमें लिखा था- “हैलो फ्रेंड्स, मेरी किताब अब उपलब्ध है। लिंक फॉलो करें | हैप्पी रीडिंग । जय हिंद।” राहुल गांधी का दावा है कि यह संदेश दर्शाता है कि पुस्तक आम पाठकों के लिए उपलब्ध कराई जा चुकी है। उन्होंने यहां तक कहा कि या तो जनरल नरवणे या फिर पेंगुइन “सच नहीं बोल रहा।” हालांकि, पेंगुइन ने दोहराया कि यह पोस्ट केवल प्री-ऑर्डर लिंक से संबंधित थी और पुस्तक को दो दिन के भीतर वापस ले लिया गया था । प्रकाशक के अनुसार, तब से अब तक फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी किसी भी ई-कॉमर्स या खुदरा मंच पर उपलब्ध नहीं है। राजनीतिक तापमान और चढ़ा इस विवाद में अब राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है। भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने राहुल गांधी पर तीखा हमला करते हुए उन्हें “राष्ट्रीय शर्मिंदगी” बताया और कहा कि वे प्री-ऑर्डर और प्रकाशित पुस्तक के बीच का अंतर तक नहीं समझते। पूनावाला ने यह सवाल भी उठाया कि यदि पुस्तक प्रकाशित नहीं हुई थी, तो राहुल गांधी के पास उसकी प्रति कैसे पहुँची। उन्होंने इसे कॉपीराइट एक्ट और यहां तक कि ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए ।
Author: Shabd Agni
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