श्री नर्मदाप्रसाद उपाध्याय डॉ. विकास दवे डॉ. गोपाल चतुर्वेदी मुकेश इन्दौरी
शब्द अग्नि न्यूज़ । इंदौर। अखंड काव्य धारा- 2026 साझा संकलन आनलाइन लाकार्पित। इस अवसर पर नर्मदाप्रसाद उपाध्याय ने कहा कि कविता मनुष्य की मौन संवेदना की मुखर अभिव्यक्ति है, यही अभिव्यक्ति मनुष्यता की पहचान है।
संस्था अखंड संडे का समर्पण इस संवेदना के प्रति अदभुत है वे इस काव्य धारा की निरंतरता को कभी खंडित नहीं होने देते और उनका यह रचनात्मक यज्ञ सम्पन्न होता रहता है। धारा चाहे जल की हो या काव्य की वह जब तक अटूट न हो तब तक वह धारा नहीं कही जाती। हम ऐसी ही अखंड काव्य धारा के साक्षी हैं जो पिछले 29 वर्षों से अटूट, अविरल और अविराम है। मैं इसका हृदय से अभिनंदन करता हूँ।
यह बातें प्रख्यात ललित निबंधकार नर्मदाप्रसाद उपाध्याय ने संस्था अखंड संडे के 29वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रकाशित अखंड काव्यधारा 2026 भाग 6 के आनलाइन लोकार्पण अवसर पर कही। इस अवसर पर साहित्य अकादमी के निदेशक डा. विकास दवे ने कहा कि संस्था अखंड संडे लम्बे समय से अखंड साधना की तरह इस काव्य अनुष्ठान को, साहित्य अनुष्ठान को सुचारू रूप से चलाने का काम कर रही है जो वंदनीय एवं स्तुत्य है। वहीं वृंदावन से प्रख्यात साहित्यकार यूपी रत्न डा. गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि इस संग्रह में 131 रचनाकारों की कविता गीत, गजल, दोहा पर 263 उत्कृष्ट रचनाएँ संकलित हैं। काव्य की यह अविरल धारा समाज में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने में सहायक है। वही कृति संपादक मुकेश इंदौरी ने कहा कि अखंड काव्यधारा अनवरत बहती रहती है। यह धारा न किसी कालखंड में ठहरती है, न किसी विचारधारा की सीमा में बंधती है। अखंड काव्यधारा जोड़ने का काम करती है। वह अतीत की स्मृति, वर्तमान की चुनौती और भविष्य की आशा तीनों की त्रिवेणी का संगम है।
Author: Shabd Agni
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