हाईकोर्ट के आदेश से तत्काल बहाल किया पुलिस कांस्टेबल को
शब्द अग्नि न्यूज़ । इंदौर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी करते हुए एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 25 वर्षों की सेवा देने वाले पुलिस कांस्टेबल को कारण बताओ नोटिस जारी करने के उसी दिन बिना सुनवाई सेवा से बर्खास्त करने की कार्रवाई को अवैध ठहराते हुए कांस्टेबल को तत्काल सेवा में बहाल करने के आदेश दिए हैं।
यह था मामला
मामला रतन कोल्हे का है। करीब 25 वर्ष पूर्व पुलिस विभाग में कांस्टेबल के रूप में भर्ती हुए रतन कोल्हे को थाने में पदस्थापना के दौरान अवैध खनन से जुड़े एक प्रकरण में वाहन जब्ती की कार्रवाई को लेकर पुलिस जनसुनवाई में की गई शिकायत के आधार पर जुलाई 2021 में निलंबित कर दिया गया था।
इसके बाद एसपी द्वारा जिस दिन कांस्टेबल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, उसी दिन बिना सुनवाई का अवसर दिए सेवा से बर्खास्त करने का आदेश भी जारी कर दिया गया। कांस्टेबल रतन कोल्हे ने बिना सुनवाई बर्खास्तगी के आदेश के खिलाफ विभागीय अपील दायर की, लेकिन उसे भी निरस्त कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने एडवोकेट प्रसन्ना आर भटनागर के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि विभाग ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हुए बिना विभागीय जांच और बिना पक्ष रखने का अवसर दिए सेवा समाप्त कर दी, जो कानूनन गलत है मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जयकुमार पिल्लई की एकल पीठ ने कांस्टेबल की याचिका स्वीकार करते हुए एसपी द्वारा जारी सेवा समाप्ति के आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता को 50% पिछले वेतन सहित अन्य सभी सेवा लाभों के साथ तत्काल सेवा में पुनः नियुक्त किया जाए। हालांकि कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यदि विभाग चाहे कानून के मुताबिक विभागीय जांच प्रक्रिया प्रारंभ कर सकता है, लेकिन बिना सुनवाई और जांच के इस तरह की कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है।
Author: Shabd Agni
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