योजना के बिना कार्य किस आधार पर ठेकदार शासन समेत चार पक्षों को नोटिस
उज्जैन। सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन के प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास के लिए बांड जारी कर धन जुटाने की योजना को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर शुक्रवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने मध्य प्रदेश शासन, उज्जैन नगर निगम, उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) और ठेकेदार फर्म एमके इंजीनियरिंग ग्रुप को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। साथ ही पूछा है कि आवश्यक स्वीकृतियों और पूरी योजना के बिना विकास कार्य कैसे शुरू किए जा रहे हैं।
याचिकाकर्ता प्रभात मोहन पांडे की ओर से अधिवक्ता रोहित शर्मा ने कोर्ट को बताया कि उज्जैन के तीन प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार एवं विकास के लिए टेंडर जारी किए गए हैं, जबकि परियोजना के लिए प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृतियां अब तक प्राप्त नहीं हुई हैं। करीब 300 करोड़ रुपये की इस परियोजना के लिए न तो यूडीए और न ही नगर निगम के पास पर्याप्त राशि उपलब्ध है।
याचिका में यह भी कहा गया कि परियोजना के लिए बांड जारी करने की प्रक्रिया और आवश्यक अनुमतियां पूरी नहीं हुई हैं। साथ ही प्रस्तावित विकास कार्यों के लिए जरूरी भूमि का अधिग्रहण भी नहीं किया गया है। अंगारेश्वर महादेव मंदिर का क्षेत्र मास्टर प्लान के तहत प्रतिबंधित क्षेत्र में होने का भी उल्लेख किया गया है।
याचिका में आशंका जताई गई कि बिना पर्याप्त योजना और संसाधनों के कार्य शुरू होने से धार्मिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं तथा सिंहस्थ-2028 के दौरान श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। मामले की अगली सुनवाई अगस्त के पहले सप्ताह में होगी।
Author: Shabd Agni
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