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July 14, 2026 7:09 am

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सीएम से चर्चा कर नरोत्तम मिश्रा दिल्ली रवाना

नरोत्तम मिश्रा की प्रेशर पॉलिटिक्स काम ना आई रिया उपचुनाव को लेकर भाजपा की रणनीति सफल

शब्द अग्नि / यासिर पठान प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सीएम मोहन यादव से मुलाकात की टिरिक करते से लेकर चुनाव लड़ने तक हर विषय पर चर्चा होना बताया जा रहा है मुख्यमंत्री से मुलाकात कर नरोत्तम सीधे दिल्ली के दरबार पहुंच गए है आगे क्या होता है यह देखना बेहद दिलचस्प होगा

जैसी करनी वैसी भरनी वाली कहावत की चर्चा 

नरोत्तम मिश्रा के टिकिट करने के साथ शुरू हुआ है वोल्टेज राजनीतिक ड्रामे के बाद चर्चाओ का दौर जारी है हालांकि टिकिट करने पर कई प्रकार के क्या लगाए जा रहे है भाजपा ने ही अंदरखाने कहा जा रहा है कि राजनीति मे कब क्या हो जाए यह कोई नहीं जानता कल तक सत्ता के सिंहासन के ठीक पास बैठे नरोत्तम मिश्रा आज खुद का विधानसभा टिकिट तक नहीं बचा पाए खैर जैसी करनी वैसी भरनी वाली कहावत राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है

यह है पूरा घटनाक्रम

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद पार्टी में सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजपा ने उनकी जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया, जिसके बाद मिश्रा समर्थकों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कई स्थानों पर सड़क जाम, नारेबाजी और पथराव की घटनाएं सामने आईं, जिसके बाद पुलिस को हालात नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा।

संगठन ने संभाला मोर्चा

घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और क्षेत्रीय संगठन मंत्री सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता सक्रिय हो गए। संगठन ने नाराज कार्यकर्ताओं से संवाद शुरू किया और स्थानीय नेताओं को एकजुट रहने का संदेश दिया। पार्टी की प्राथमिकता उपचुनाव में किसी भी तरह की गुटबाजी को रोककर चुनावी अभियान को मजबूत करना है।

नरोत्तम मिश्रा ने समर्थकों से की शांति की अपील

विरोध के बीच डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने संयमित रुख अपनाते हुए अपने समर्थकों से शांत रहने और पार्टी के फैसले का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनके लिए पार्टी सर्वोपरि है और वे भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार आशुतोष तिवारी के समर्थन में पूरी निष्ठा से चुनाव प्रचार करेंगे।

टिकट कटने के पीछे क्या हैं कारण ?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दतिया में स्थानीय स्तर पर मिले फीडबैक, बदलते चुनावी समीकरण और संगठन की रणनीति के चलते भाजपा नेतृत्व ने उम्मीदवार बदलने का फैसला लिया। हालांकि पार्टी ने आधिकारिक रूप से इसे सामान्य संगठनात्मक निर्णय बताया है और किसी भी तरह के मतभेद से इनकार किया है।

भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की परीक्षा

दतिया उपचुनाव अब केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि भाजपा की संगठनात्मक एकजुटता और नेतृत्व क्षमता की भी परीक्षा बन गया है। टिकट विवाद के बाद पार्टी डैमेज कंट्रोल में जुटी है, जबकि विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा की अंदरूनी कलह बताकर राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है।

Shabd Agni
Author: Shabd Agni

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