शैक्षणिक संस्थानों में उपयोग के बजाय महीनों से खुले में रखे हैं सैकड़ों डेस्क-बेंच, कुर्सियां और अलमारियां; समय रहते व्यवस्था नहीं हुई तो बढ़ेगा सरकारी नुकसान
उपेक्षा की तस्वीर
सरकारी स्कूलों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खरीदा गया फर्नीचर अब उपयोग के बजाय उपेक्षा का शिकार होता दिखाई दे रहा है। शहर के एक विद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में डेस्क-बेंच, टेबल, कुर्सियां और अलमारियां लंबे समय से खुले में रखी हैं। बारिश, धूप और नमी के कारण इनकी गुणवत्ता लगातार प्रभावित हो रही है, जिससे सरकारी संसाधनों के नुकसान की आशंका बढ़ गई है।
वितरण प्रक्रिया पर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार संबंधित विद्यालयों तक नया फर्नीचर पहुंचाने की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी है। कई स्थानों पर आवश्यकता होने के बावजूद सामग्री का समय पर आवंटन नहीं हो पाया। ऐसे में बड़ी मात्रा में फर्नीचर गोदाम या विद्यालय परिसर में ही पड़ा है। शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों का कहना है कि समय पर योजना बनाकर वितरण किया जाता तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
बच्चों की पढ़ाई पर भी असर
नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के बीच कई स्कूल अब भी पर्याप्त फर्नीचर की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कुछ स्थानों पर विद्यार्थियों को पुराने और जर्जर फर्नीचर का सहारा लेना पड़ रहा है, जबकि दूसरी ओर उपयोग योग्य नया सामान खुले में पड़ा हुआ है। इससे संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और विभागीय समन्वय पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
समय रहते समाधान जरूरी
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अतिरिक्त फर्नीचर का शीघ्र सर्वे कर वास्तविक आवश्यकता वाले विद्यालयों में पारदर्शी तरीके से वितरण किया जाए, तो सरकारी धन की बचत के साथ विद्यार्थियों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकती हैं। वहीं लंबे समय तक खुले में रखे सामान की नियमित निगरानी और सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था करना भी आवश्यक माना जा रहा है।
Author: Shabd Agni
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