100 से अधिक संपत्तियों की हो चुकी रजिस्ट्री, नोटिस जारी कर जुटाए जा रहे जवाब; कर्मचारियों पर भी गिरेगी गाज
शब्द अग्नि / इंदौर । नगर सरकार के राजमहल नगर निगम में सामने आए कथित फर्जी नामांतरण प्रकरणों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। नगर निगम ने ऐसे **354 मामलों** में पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी है। इन मामलों में कई संपत्तियों का नामांतरण कथित रूप से गलत जानकारी और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
100 से अधिक संपत्तियों की हो चुकी रजिस्ट्री
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि विवादित नामांतरण वाले मामलों में **100 से अधिक संपत्तियों की रजिस्ट्री** भी हो चुकी है। इससे पूरे मामले की गंभीरता बढ़ गई है। अब निगम यह पता लगाने में जुटा है कि नामांतरण की प्रक्रिया किन परिस्थितियों और किन दस्तावेजों के आधार पर पूरी की गई।
संबंधित लोगों को जारी किए गए नोटिस
नगर निगम ने सभी 354 मामलों में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अधिकारियों के अनुसार प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच की जा रही है और दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बिल कलेक्टरों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई
मामले में लापरवाही या अनियमितता की आशंका के चलते नगर निगम ने **38 बिल कलेक्टरों** को उनके वर्तमान वार्डों से हटाकर अन्य स्थानों पर पदस्थ कर दिया है। इसके अलावा कुछ अन्य कर्मचारियों के कार्यक्षेत्र में भी बदलाव किया गया है। जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वालों पर विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है।
एजेंटों की भूमिका भी जांच के दायरे में
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषी व्यक्तियों, एजेंटों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। यह भी जांच की जा रही है कि कहीं फर्जी दस्तावेज तैयार करने या प्रस्तुत करने में किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका तो नहीं रही।
निगम का संदेश—दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नामांतरण प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच के आधार पर जो भी व्यक्ति या कर्मचारी दोषी पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Author: Shabd Agni
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