मेघालय पुलिस की जमानत रद्द करने की दलीले बेअसर फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने राहत बरकरार रखी
शब्द अग्नि / नई दिल्ली देशभर में चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। मेघालय हाईकोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी और जमानत निरस्त करने की मांग की थी। हालांकि शीर्ष अदालत ने तत्काल हस्तक्षेप से इनकार करते हुए फिलहाल जमानत बरकरार रखी। जमानत फैसले को लेकर लोगो में आश्चर्य है
मेघालय पुलिस की दलील बेअसर
वही राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए अदालत में दलील दी कि यह मामला एक सुनियोजित हत्या से जुड़ा है और अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को जमानत नहीं मिलनी चाहिए थी। सरकार का कहना था कि हाईकोर्ट ने जमानत देते समय कानूनी पहलुओं का सही मूल्यांकन नहीं किया और आदेश में कई त्रुटियां हैं।
केवल आरोपों की गंभीरता ही पर्याप्त आधार नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान कहा कि जमानत रद्द करने के लिए केवल आरोपों की गंभीरता ही पर्याप्त आधार नहीं होती। अदालत प्रत्येक मामले में कानूनी मानकों और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर निर्णय लेती है। इसी कारण फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार किया गया।
इस फैसले के बाद आम लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि इतने चर्चित और गंभीर मामले में भी आरोपी की जमानत क्यों बरकरार रही। कानूनी जानकारों का कहना है कि जमानत देना और जमानत रद्द करना दोनों अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं। यदि जमानत मिलने के बाद आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ करे, गवाहों को प्रभावित करे या जमानत की शर्तों का उल्लंघन करे, तभी उसे रद्द करने के आधार मजबूत माने जाते हैं।
Author: Shabd Agni
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