अब नहीं बच पाएंगे साइबर ठग इंदौर पुलिस ने IMEI ब्लॉक कर दर्जनों मोबाइल किए निष्क्रिय
शब्द अग्नि / यासिर पठान इंदौर। साइबर अपराधियों पर शिकंजा कसते हुए इंदौर अपराध शाखा ने बड़ी तकनीकी कार्रवाई की है। अब सिर्फ फर्जी सिम कार्ड ही नहीं, बल्कि साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल फोन भी पूरी तरह बेकार किए जा रहे हैं। पुलिस ने पहली बार ऐसे मोबाइलों के आईएमईआई (IMEI) नंबर ब्लॉक कर दर्जनों डिवाइस निष्क्रिय कर दिए हैं।
डीसीपी (अपराध) राजेश कुमार त्रिपाठी* ने बताया कि राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर प्राप्त शिकायतों के विश्लेषण के दौरान कई ऐसे मोबाइल नंबर चिन्हित किए गए, जिनका उपयोग बार-बार ऑनलाइन ठगी के लिए किया जा रहा था। पहले इन नंबरों की सिम बंद कराई जाती थी, लेकिन आरोपी नई सिम लगाकर फिर सक्रिय हो जाते थे। इसी समस्या का स्थायी समाधान निकालते हुए अब संबंधित मोबाइल हैंडसेट का **आईएमईआई नंबर ब्लॉक** कराया जा रहा है।
क्या है IMEI ब्लॉकिंग
हर मोबाइल फोन का 15 अंकों का एक यूनिक **आईएमईआई (International Mobile Equipment Identity) नंबर होता है। यह मोबाइल की डिजिटल पहचान होती है। एक बार आईएमईआई ब्लॉक होने के बाद वह मोबाइल देश के किसी भी टेलीकॉम नेटवर्क पर काम नहीं करता। यानी नई सिम लगाने पर भी उससे कॉल, मैसेज या इंटरनेट का उपयोग संभव नहीं होता।
इन तरीकों से लोगों को बनाते थे शिकार
जांच में सामने आया कि ब्लॉक किए गए मोबाइल नंबरों का उपयोग कई तरह की साइबर धोखाधड़ी में किया जा रहा था, जिनमें शामिल हैं—
- शेयर बाजार में मोटे मुनाफे का लालच देकर ठगी।
- * वर्क फ्रॉम होम और पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर धोखाधड़ी।
- केवाईसी अपडेट नहीं करने का डर दिखाकर बैंक खाते और मोबाइल हैक करना।
- फर्जी लोन ऐप के जरिए लोगों को ठगना।
- निवेश पर दोगुना रिटर्न का झांसा देना।
फर्जी कस्टमर केयर बनकर बैंकिंग जानकारी हासिल करना।
सेक्सटॉर्शन गैंग भी रडार पर
अपराध शाखा ने बताया कि अब कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए सेक्सटॉर्शन और डिजिटल एक्सटॉर्शन में शामिल गिरोहों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल नंबरों और डिवाइस की भी पहचान की जा रही है। ऐसे मामलों में भी आईएमईआई ब्लॉक करने की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
Author: Shabd Agni
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