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July 9, 2026 1:20 am

दमोह : मौत की छांव में 162 मासूम

7.95 करोड़ की मरम्मत राशि के बावजूद खिरिया असली स्कूल बदहाल, मंत्री के क्षेत्र में बच्चों की जान से खिलवाड़!

 

शब्द अग्नि /अनुराग बजाज  दमोह । जिले में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का सबसे चिंताजनक उदाहरण बटियागढ़ विकासखंड के खिरिया असली गांव का एकीकृत शाला भवन है। यहां कक्षा पहली से आठवीं तक के 162 बच्चे ऐसे जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर हैं, जिसकी छत और दीवारें कभी भी बड़ा हादसा बन सकती हैं। बारिश के मौसम में स्थिति और भयावह हो जाती है, लेकिन वर्षों से शिकायतों के बावजूद स्कूल की मरम्मत नहीं हो सकी।

क्षेत्र के विधायक है राज्यमंत्री फिर भी यह हाल

खास बात यह है कि खिरिया असली पथरिया विधानसभा क्षेत्र में आता है, जहां के विधायक लखन पटेल प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार में राज्यमंत्री हैं। ऐसे में क्षेत्र के स्कूलों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था पर उनकी भी जिम्मेदारी बनती है। इसके बावजूद उनके ही विधानसभा क्षेत्र के बच्चे आज भी मौत के साये में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

प्राचार्य कई बात कर चुके अवगत

स्कूल के प्रधानाध्यापक राधे पटेल का कहना है कि उन्होंने कई बार विभागीय अधिकारियों को भवन की जर्जर स्थिति से अवगत कराया और मरम्मत के लिए पत्र लिखे, लेकिन आज तक एक रुपये की राशि भी स्वीकृत नहीं हुई। हर बारिश में छत टपकने लगती है, इसलिए बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए हर वर्ष 8 से 10 किलो की तिरपाल लगानी पड़ती है। कई जगह टीन की चादर लगाकर बारिश रोकने की कोशिश की जाती है, जबकि दीवारों में पानी भरने से पूरा भवन लगातार कमजोर होता जा रहा है।

करोड़ों रुपए मरम्मत में खर्च

विडंबना यह है कि जिले के 289 जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए शासन ने गौण खनिज मद से दो किस्तों में 7 करोड़ 95 लाख रुपये स्वीकृत किए थे। इसके बावजूद खिरिया असली स्कूल को मरम्मत के लिए कोई राशि नहीं मिली। जानकारी के अनुसार जिले में करीब 40 स्कूल भवनों में आज तक मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो सका है, जबकि देरी के कारण करीब 10 भवनों की मरम्मत राशि वापस भी हो चुकी है। इससे सवाल उठ रहे हैं कि जब सरकार ने पैसा उपलब्ध करा दिया था, तो उसका उपयोग क्यों नहीं किया गया ?

जिला शिक्षा अधिकारी ने हाल ही में निर्देश जारी किए हैं कि जिन स्कूल भवनों की स्थिति जर्जर है, उनमें कक्षाएं न लगाई जाएं और वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। उन्होंने खिरिया असली स्कूल की भी जांच कराने की बात कही है।

उठ रहे अनगिनत सवाल

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या शिक्षा विभाग और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं? यदि समय रहते स्कूल भवन की मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो इसकी कीमत मासूम बच्चों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ सकती है। करोड़ों रुपये की स्वीकृत राशि और विभागीय दावों के बीच खिरिया असली का यह स्कूल सरकारी व्यवस्था की संवेदनहीनता की एक गंभीर तस्वीर बनकर सामने खड़ा है।

Shabd Agni
Author: Shabd Agni

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