महेश पटेल ने मुख्यमंत्री से मांगी SIT जांच, 15 सवालों से प्रशासन को घेरा
एफआईआर, जवाबदेही तय करने और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की उठाई मांग
शब्द अग्नि मुस्तकीममुगल
आलीराजपुर। जनजातीय कार्य विभाग के करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों एवं वित्तीय अभिलेख खुले में मिलने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल (रावत) ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को विस्तृत शिकायत भेजकर पूरे मामले की SIT से जांच, दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
महेश पटेल ने आरोप लगाया कि विभाग के महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज रिकॉर्ड रूम में सुरक्षित रखने के बजाय खुले खंडहर में बिखरे मिले। उनका कहना है कि इन अभिलेखों में करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों से जुड़े दस्तावेज, तकनीकी स्वीकृतियां, टेंडर, भुगतान और अन्य संवेदनशील रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मामला मीडिया में आने के बाद अधिकारियों द्वारा रिकॉर्ड को जल्दबाजी में हटाने का प्रयास किया गया।
मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायत पत्र में परिषद ने छह प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच अथवा SIT का गठन, सभी रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन), जांच पूरी होने तक अभिलेखों से छेड़छाड़ पर रोक, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना, भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत एफआईआर दर्ज करना तथा पूरी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करना शामिल है।

15 सवालों से प्रशासन पर उठाए गंभीर प्रश्न
महेश पटेल ने प्रशासन से 15 सवाल पूछते हुए जानना चाहा है कि गोपनीय सरकारी दस्तावेज खुले में कैसे पहुंचे, रिकॉर्ड रूम होने के बावजूद उन्हें बाहर किसके निर्देश पर रखा गया, यदि दस्तावेज महत्वहीन थे तो उन्हें हटाने की जल्दबाजी क्यों दिखाई गई और यदि कोई रिकॉर्ड गायब मिलता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
शिकायत की प्रतिलिपि जनजातीय कार्य मंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग, संभागायुक्त इंदौर, कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई है।
परिषद का कहना है कि सरकारी अभिलेख जनता की अमूल्य धरोहर हैं और इनके संरक्षण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। यदि जांच होती है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी रिकॉर्ड खुले में कैसे पहुंचे और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
Author: Shabd Agni
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