शब्द अग्नि / राज ठाकुर बाड़ी व्यवस्था की खामियों से इसका लाभ किसानों तक नहीं पहुंच रहा। मुख्य नहरों में पानी बह रहा है। खेतों तक पानी पहुंचाने वाली माइनर और सब माइनर नहरें सफाई, मरम्मत के अभाव में सूखी पड़ी हैं। कई जगह झाड़ियां, मिट्टी, मलबा पानी का रास्ता रोक रहा है। कई जगह टूट-फूट से पानी बीच रास्ते में बहकर नष्ट हो रहा है। धान की रोपाई का सबसे महत्वपूर्ण समय चल रहा है। खेतों तक सिंचाई नहीं पहुंचने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। रायसेन और सीहोर जिले के लगभग एक लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र पर असर पड़ने की आशंका है। किसानों का दावा है कि उन्होंने समय रहते विभाग को समस्या बताई थी। समाधान नहीं हुआ। अब आंदोलन की चेतावनी दी जा रही है।
झाड़ियों के कारण रोका पानी
झाड़ियों और टूटी नहरों में अटका पानी, खेतों तक नहीं पहुंची सिंचाई बारना सिंचाई विभाग ने पानी छोड़ने से पहले सभी नहरों की सफाई और मरम्मत का दावा किया था, लेकिन जमीनी स्थिति इससे अलग है। अधिकांश माइनर और सब माइनर नहरों में मिट्टी, झाड़ियां और कटिदार वनस्पति जमा होने से पानी का प्रवाह बाधित हो रहा है। कई जगह नहरें क्षतिग्रस्त हैं, जिससे पानी बीच रास्ते में ही रिसकर या बहकर व्यर्थ चला जा रहा है। परिणामस्वरूप टेल क्षेत्र के किसानों के खेत अब भी सूखे पड़े हैं और धान की रोपाई प्रभावित हो रही है।
एसडीओ बोले-नहरों का निरीक्षण कराया जा रहा है
उधर बारना परियोजना के एसडीओ विकास अम्लानी ने कहा, ‘किसानों की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। संबंधित क्षेत्र की माइनर और सब माइनर नहरों का निरीक्षण कराया जा रहा है। जहां तकनीकी या रखरखाव संबंधी बाधाएं एं हैं, हैं, उन्हें प्राथमिकता से दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। हमारा प्रयास है कि जल्द से जल्द पानी अंतिम छोर तक पहुंचाकर किसानों को समय पर सिंचाई उपलब्ध कराई जाए, ताकि धान की रोपाई प्रभावित न हो।’
किसान बोले- शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
घोंट के सरपंच कमल सिंह ठाकुर ने बताया, ‘8 जुलाई से नहर में पानी छोड़ा गया है, लेकिन हमारे गांव तक अब तक पानी नहीं पहुंचा। इसकी शिकायत विभाग से की जा चुकी है। यदि जल्द पानी नहीं मिला तो किसानों के साथ आंदोलन किया जाएगा।’
Author: Shabd Agni
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