बस बॉडी उद्योग पर संकट 27 लाख रुपये तक के टाइप अप्रूवल खर्च ने बढ़ाई चिंता, नए सर्टिफिकेशन नियमों से थमे कारखाने,
शब्द अग्नि / यासिर पठान इंदौर। प्रदेश के बस बॉडी निर्माण उद्योग पर नए तकनीकी नियमों का असर साफ दिखाई देने लगा है। टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट की अनिवार्यता और उससे जुड़ी ऊंची लागत के कारण प्रदेश के कई बस बॉडी निर्माण कारखानों में कामकाज प्रभावित हो गया है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि बड़ी संख्या में तैयार और अधूरी बस बॉडी खड़ी हैं, जबकि नए ऑर्डर भी प्रभावित हो रहे हैं।
हजारों के रोजगार पर संकट
उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार प्रदेश में करीब 1,000 बस बॉडी निर्माण इकाइयां संचालित हैं, जिनसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 50 हजार लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद कई इकाइयों में उत्पादन धीमा पड़ गया है, जिससे श्रमिकों और छोटे कारोबारियों के सामने रोजगार का संकट गहराता जा रहा है।
एक मॉडल पर लाखों का खर्च
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि एक बस मॉडल के लिए टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट प्राप्त करने में लगभग 27 लाख रुपये तक का खर्च आ रहा है। यदि किसी निर्माता के तीन अलग-अलग मॉडल हैं, तो प्रत्येक के लिए अलग सर्टिफिकेट लेना होगा। ऐसे में कुल खर्च करीब एक करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जो छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
कितना हो सकता है सर्टिफिकेट का खर्च
- एजेंसी की मॉडल टेस्टिंग फीस: ₹14 लाख
- फैक्ट्री निरीक्षण फीस: **₹8 लाख**
- अन्य तकनीकी व प्रशासनिक शुल्क: करीब ₹5 लाख
- एक मॉडल का कुल अनुमानित खर्च: लगभग ₹27 लाख
- तीन मॉडल होने पर कुल खर्च: करीब ₹1 करोड़
सरकार से राहत की माँग
बस बॉडी निर्माता संगठनों ने सरकार से मांग की है कि सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को सरल बनाया जाए तथा शुल्क में राहत दी जाए। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो प्रदेश का बस बॉडी उद्योग गंभीर आर्थिक संकट में पहुंच सकता है और हजारों लोगों के रोजगार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
Author: Shabd Agni
.