एसजीएसआईटीएस की नई पहल से ग्रामीण छात्रों को मिलेगा बड़ा मौका
शब्द अग्नि / इंदौर । तकनीकी शिक्षा को अधिक समावेशी और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में **एसजीएसआईटीएस** ने अहम कदम उठाया है। आगामी शैक्षणिक सत्र से संस्थान पहली बार **बीटेक सिविल इंजीनियरिंग** की पढ़ाई हिंदी माध्यम में शुरू करने जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य उन विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है, जिन्होंने हिंदी माध्यम से पढ़ाई की है या जो ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं।
पढ़ाई नही जाएगी व्यर्थ
इस पाठ्यक्रम की सबसे खास बात इसकी मल्टीपल एंट्री और एग्जिट व्यवस्था है। यदि कोई विद्यार्थी किसी कारणवश चार साल का कोर्स पूरा नहीं कर पाता, तब भी उसकी पढ़ाई व्यर्थ नहीं जाएगी। पहले वर्ष के बाद छात्र ड्राफ्ट्समैन से जुड़े कार्यों के लिए योग्य माना जाएगा। दूसरे वर्ष के बाद साइट सुपरविजन जैसे कार्यों में अवसर मिल सकेंगे। तीन वर्ष पूरे करने पर सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा प्रदान किया जाएगा, जबकि चार वर्ष का पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा करने पर बीटेक की डिग्री मिलेगी।
हिंदी होगी तो अच्छा होगा संवाद
संस्थान का मानना है कि हिंदी माध्यम में तकनीकी शिक्षा मिलने से निर्माण स्थलों पर इंजीनियरों और श्रमिकों के बीच संवाद अधिक प्रभावी होगा। अधिकांश कार्यस्थलों पर निर्देश और तकनीकी जानकारी हिंदी या स्थानीय भाषा में साझा की जाती है। ऐसे में मातृभाषा में पढ़ाई करने वाले इंजीनियर डिजाइन, सुरक्षा मानकों और कार्य प्रक्रिया को अधिक स्पष्टता से समझा और समझा सकेंगे।
Author: Shabd Agni
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