शब्द अग्नि न्यूज़ । भोपाल। मध्यप्रदेश में सत्ता के विकेंद्रीकरण और पंचायती राज के दावों की धज्जियां उड़ गई हैं। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ताजा रिपोर्ट ने एक संवैधानिक धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया है। इस खुलासे ने शासन व्यवस्था की जड़ों को हिलाकर रख दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के सरकारी विभागों ने कागजों पर तो पंचायतों और नगरीय निकायों को अधिकार सौंपने का नाटक किया, लेकिन बजट की तिजोरी की चाबी आज भी अपने ही पास दबाकर रखी है। कैग की जांच में यह सनसनीखेज तथ्य सामने आया है कि विभागों ने अनुदान की राशि तो स्थानीय निकायों के नाम पर दिखाई, लेकिन उसका आहरण और संवितरण करने का पावर खुद के पास ही रखा। संविधान की अनुसूची 11 और 12 के तहत जिन विषयों, कर्मचारियों और फंड का हस्तांतरण होना था, वह कभी धरातल पर उतरा ही नहीं।
Author: Shabd Agni
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