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वन्यजीव संरक्षण ने बढ़ाई है मप्र की साख

शब्द अग्नि न्यूज़ । भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के वन, जैव विविधता की दृष्टि से निरंतर समृद्ध हो रहे हैं। केंद्रीय वन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव द्वारा शनिवार को बोत्सवाना अफ्रीका से लाए गए 9 चीते कूनो नेशनल पार्क में छोड़े गए हैं। इस महत्वपूर्ण कदम ने वन्य जीवों के संरक्षण की दिशा मैं मध्यप्रदेश की साख और बढ़ाई है वन्यजीवों को लेकर भारत का नाम विश्व में स्थापित हुआ है। एशिया से जो चीता विलुप्तप्राय हुआ था, आज उसकी प्रजाति पुनः आबाद हो रही है। प्रदेश में अब चीतों की कुल संख्या 48 हो गई है।

साथ ही मध्यप्रदेश, देश में सर्वाधिक टाइगर, सर्वाधिक चीतों वाला राज्य हो गया है। घड़ियाल के मामले में भी मध्यप्रदेश, देश में नंबर वन है। गत दिनों गिद्धों की गणना के अनुसार भी प्रदेश जैव विविधता में समृद्ध हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह जानकारी ग्वालियर विमानतल पर मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज भी कूनो नदी में दुर्लभ प्रजाति के कछुए और घड़ियाल छोड़े जा रहे हैं। यह राज्य सरकार की जलचरों को बढ़ावा देने की योजना का हिस्सा है। वन्य प्राणियों के संरक्षण से बढ़ती जैव विविधता से प्रदेश में पर्यटन के अवसर निर्मित हो रहे हैं, जिससे रोजगार के नए मौके भी लोगों को मिल रहे हैं।

राज्य सरकार का प्रयास है कि इन गतिविधियों का लाभ सभी को मिले। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में जैव विविधता के संरक्षण की दिशा ऐतिहासिक कदम आगे बढ़ाते हुए आज दुर्लभ प्रजाति के 33 कछुए और 53 घड़ियाल कूनो नदी में छोड़ रहे हैं। जिन कछुओं को नदी में छोड़ा जा रहा है वे मुरैना के कछुआ केन्द्र बरहई से लाए गए हैं। तैंतीस में से 25 कछुए तीन पट्टीदार छत वाले और 8 भारतीय फ्लेप शेल कछुआ है। देवरी घड़ियाल केन्द्र से लाकर 53 घड़ियालों को कूनो नदी में छोड़ा जा रहा है, ये कछुए ढोगोंका और घड़ियाल, गंगा एवं ब्रह्मपुत्र नदी क्षेत्रों में पाई जाने वाली दुर्लभ जलीय प्रजातियां हैं। जो जैव विविधता की अनमोल धरोहर हैं और नदियों के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन प्रजातियों को अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर की रेड लिस्ट में संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है। राज्य सरकार इनके संरक्षण के लिए सार्थक प्रयास कर रही है।

Shabd Agni
Author: Shabd Agni

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