क्षेत्र में नदी-नाले सूखे, हजारों मवेशी पानी को तरसे भीषण जल संकट के संकेत
शब्द अग्नि / राज ठाकुर बाड़ी
रायसेन। बारना बांध की नहरों में पानी बंद होने से क्षेत्र के नदी-नाले पूरी तरह सूख गए हैं। अप्रैल माह की भीषण गर्मी में नदी-नालों में रेत ही रेत नजर आ रही है। बच्चे सूखे पाट में क्रिकेट खेल रहे हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के हजारों मवेशी पानी के लिए हैरान-परेशान हो रहे हैं।
क्यों सूखे नदी-नाले
जलाभाव के मुख्य कारण जल ग्रहण क्षेत्र में वृक्षों की अंधाधुंध कटाई, ईंटों का निर्माण और सिंचाई में पानी का अत्यधिक उपयोग बताया जा रहा है। तालाबों में भी पानी नहीं बचा, जिससे भू-जल स्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है।
गिरता भू-जल स्तर
क्षेत्र में ट्यूबवेलों का तेजी से उत्खनन हो रहा है। हजारों किसान गर्मी में मूंग की खेती कर रहे हैं, जिससे भू-जल पर दबाव बढ़ा है। वर्तमान में भू-जल स्तर 40-50 मीटर तक पहुंच चुका है। हालात ऐसे ही रहे तो इस वर्ष यह 2-3 मीटर और नीचे खिसक सकता है।
नहरों में पानी छोड़ने की मांग
रामजी ठाकुर,अंसार, अली,महेंद्र सिंह सहित किसानों का कहना है कि क्षेत्र में सैकड़ों किमी बारना बांध की नहरें फैली हुई हैं और इस वर्ष बांध में पानी भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। यदि नहरों में बांध से पानी छोड़ा जाए तो वह नदी-नालों में पहुंचेगा। इससे हजारों मवेशियों की पीने के पानी की समस्या हल होगी और गिरता भू-जल स्तर भी सुधरेगा। पानी की तलाश में मवेशी भी सड़कों पर आ रहे हैं, जिससे हादसों का खतरा बढ़ गया है।
Author: Shabd Agni
.