VISITORS

0 0 8 4 0 4

June 1, 2026 3:01 am

+91 8878812345

Explore

Search

June 1, 2026 3:01 am

जीवन में शांति चाहिए तो परिस्थिति नहीं, दृष्टिकोण बदलना होगा: आचार्य पुष्कर परसाई

पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुआ सात दिवसीय श्रीमद्भागवत गीता ज्ञान यज्ञ

शब्द अग्नि / सचिन जैन

बैतूल। गंज स्थित विश्वकर्मा मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत गीता पुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह का समापन रविवार 31 मई को पूर्णाहुति, भंडारा प्रसादी के साथ संपन्न हुआ। अंतिम दिवस पर भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की अमर मित्रता प्रसंग, दत्तात्रेय के जीवन दर्शन तथा कलियुग में कल्कि अवतार के महत्व का वर्णन किया गया। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया और भंडारा प्रसादी ग्रहण की।

कृष्ण-सुदामा की मित्रता का सुनाया प्रेरक प्रसंग

भागवताचार्य डॉ. पुष्कर परसाई ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि सुदामा गरीब अवश्य थे, लेकिन दरिद्र नहीं थे। उन्होंने बताया कि मित्र, बेटी, गुरु और मंदिर के यहां कभी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए। कथा में कहा गया कि जो व्यक्ति भगवान की ओर एक कदम बढ़ाता है, भगवान उसकी ओर साठ कदम बढ़ाते हैं। संकट के समय जो साथ खड़ा रहे वही सच्चा सखा कहलाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन से मित्रता, समर्पण और भक्तवत्सलता का संदेश दिया।

भगवान शरणागत की रक्षा अवश्य करते हैं

कथा में भगवान श्रीकृष्ण के विवाह प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि भगवान ने 16 हजार 108 कन्याओं की रक्षा और सम्मान के लिए उनसे विवाह किया। प्रवचन में कहा गया कि जब जीव सब कुछ त्यागकर भगवान की शरण में जाता है तो भगवान उसे अपना लेते हैं। प्रसन्न और शांत आत्मा वही है जो हर परिस्थिति में संतुलित और शांत बनी रहे। कथा में यह भी बताया गया कि गणेश चतुर्थी का चंद्रमा देखने से बचना चाहिए तथा भगवान जामवंत और जामवती से जुड़े प्रसंगों का भी वर्णन किया गया।

दत्तात्रेय के 24 गुरुओं से जीवन का संदेश

भागवताचार्य ने सुखदेव एवं भगवान दत्तात्रेय के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि दत्तात्रेय ने प्रकृति और जीवन के विभिन्न तत्वों को अपना गुरु बनाया। उन्होंने पृथ्वी से सहनशीलता, जल से मधुर वाणी, अग्नि से ज्ञान और तेज, समुद्र से मर्यादा, हंस से विवेक तथा मधुमक्खी से अधिक संचय न करने की सीख प्राप्त की। छोटे बच्चों को भी गुरु मानकर उनसे निष्कपटता और सरलता का गुण ग्रहण करने का संदेश दिया गया। श्रद्धालुओं को बताया गया कि मनुष्य जैसा सोचता है, वैसा ही बन जाता है।

Shabd Agni
Author: Shabd Agni

.

विज्ञापन
लाइव क्रिकेट स्कोर