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सात साल से न्याय की लड़ाई लड़ रही महिला कुसुम

पांच कलेक्टर बदले लेकिन नहीं सुलझा शासकीय भूमि विवाद
कलेक्टर ने खुद की थी जांच, कोर्ट से भी मिला फैसला, फिर भी नहीं हुआ विवाद का स्थायी समाधान
सात वर्षों से दफ्तर-दफ्तर भटक रही महिला, राजस्व रिकॉर्ड और न्यायालयीन आदेशों के बाद भी विवाद बरकरार
शब्द अग्नि / सचिन जैन 
बैतूल। प्रभातपट्टन ब्लॉक के ग्राम गौना की 64 वर्षीय श्रीमती कुसुम पिता सुक्कू झरबड़े पिछले सात वर्षों से शासकीय आबादी भूमि से जुड़े विवाद और अपने अधिकारों की बहाली के लिए प्रशासनिक कार्यालयों से लेकर न्यायालय तक प्रयास कर रही हैं। इस दौरान जिले में कई कलेक्टर बदले, अनेक राजस्व अधिकारियों ने जांच की, सीमांकन हुए, पंचनामे बने और न्यायालय में सुनवाई भी हुई, लेकिन कुसुम का कहना है कि आज तक विवाद का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
– सीमांकन से शुरू हुआ लंबा विवाद

विवाद ग्राम गौना की खसरा नंबर 140 स्थित शासकीय आबादी भूमि से जुड़ा है। राजस्व अभिलेखों, सीमांकन रिपोर्टों और विभिन्न जांच प्रतिवेदनों में अलग-अलग समय पर मौके की स्थिति दर्ज की गई। वर्ष 2019 से शुरू हुए इस मामले में कई बार सीमांकन हुआ और राजस्व अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण भी किए। कुसुम का दावा है कि जिस भूमि पर उनका और उनके परिवार का वर्षों से निवास था, उससे जुड़े अधिकार और सीमाओं को लेकर लगातार विवाद बना रहा।
कोर्ट तक पहुंचा मामला, स्टे आवेदन भी हुआ खारिज
मामला बाद में सिविल न्यायालय तक पहुंचा। अनिल पिता छोटेलाल सहित अन्य वादियों ने न्यायालय में स्थायी निषेधाज्ञा और अस्थायी राहत की मांग करते हुए आवेदन प्रस्तुत किया था। तृतीय व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खंड मुलताई ने 24 दिसंबर 2024 को पारित आदेश में अस्थायी निषेधाज्ञा का आवेदन निरस्त कर दिया। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि वादी यह प्रथम दृष्टया साबित नहीं कर सके कि विवादित टीन शेड उनकी निजी भूमि खसरा नंबर 138 पर स्थित था। न्यायालय ने यह भी माना कि विवादित टीन शेड हटाया जा चुका है तथा वादी प्रथम दृष्टया मामला, अपूर्णीय क्षति और सुविधा के संतुलन के बिंदु स्थापित नहीं कर सके।
कलेक्टर ने खुद की थी मौके पर जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन कलेक्टर स्वयं मौके पर पहुंचे थे और स्थल की स्थिति का अवलोकन किया था। इसके बाद भी विवाद समाप्त नहीं हुआ। कुसुम का कहना है कि जिले में कई कलेक्टरों के समक्ष उन्होंने आवेदन प्रस्तुत किए, लेकिन समस्या का पूर्ण समाधान आज तक नहीं हो पाया।
एसडीएम ने तहसीलदार को दिए थे कार्रवाई संबंधी निर्देश
अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मुलताई ने 9 अक्टूबर 2024 को तहसीलदार प्रभातपट्टन को पत्र जारी कर मामले की जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। पत्र में उल्लेख किया गया था कि कुसुम पिता सुक्कू झरबड़े द्वारा संभाग आयुक्त नर्मदापुरम के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की गई है। एसडीएम ने मामले की वस्तुस्थिति स्पष्ट करने, आवश्यक राजस्व कार्रवाई करने तथा की गई कार्रवाई की जानकारी उच्च अधिकारियों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।
राजस्व रिकॉर्ड में कब्जे और निर्माण संबंधी स्थिति का उल्लेख
राजस्व अभिलेखों और विभिन्न राजस्व आदेशों में खसरा नंबर 140 की आबादी भूमि के भूखंड क्रमांक 31 एवं अन्य संबंधित भूखंडों पर समय-समय पर कब्जे और निर्माण संबंधी स्थिति का उल्लेख दर्ज किया गया है। जांच प्रतिवेदनों में टीन शेड, बाउंड्री, शौचालय और अन्य निर्माणों का भी जिक्र किया गया है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर राजस्व स्तर पर विभिन्न कार्यवाहियां और आदेश पारित किए गए।
कार्रवाई के दावों के बीच जमीन पर विवाद कायम
कुसुम का कहना है कि प्रशासनिक रिकॉर्ड में समय-समय पर कार्रवाई का उल्लेख किया गया, लेकिन विवाद का अंतिम समाधान नहीं हो पाया। उनका आरोप है कि विभिन्न जांचों और आदेशों के बावजूद मौके की स्थिति को लेकर मतभेद बने हुए हैं। इसी कारण उन्हें लगातार आवेदन और शिकायतें प्रस्तुत करनी पड़ रही हैं।

 स्वामित्व योजना और भूखंडों पर भी उठा विवाद
मामले में स्वामित्व योजना, ड्रोन सर्वे, भूखंड क्रमांक 31 और 36 की सीमाओं तथा कब्जे की स्थिति को लेकर भी विवाद सामने आया। राजस्व अभिलेखों में भूखंड क्रमांक 31 को शासकीय भूमि बताया गया है, जबकि भूखंड क्रमांक 36 पर यमुना पति सुक्कू के कब्जे और पट्टे संबंधी उल्लेख भी दर्ज है। विभिन्न जांचों और प्रतिवेदनों में भूमि की स्थिति को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे सामने आते रहे हैं।
सात साल बाद भी अंतिम समाधान का इंतजार
लगातार शिकायतों, सीमांकन, राजस्व प्रकरणों, न्यायालयीन सुनवाई और उच्च प्रशासनिक स्तर पर जांच के बावजूद ग्राम गौना का यह भूमि विवाद अब भी चर्चा का विषय बना हुआ है। 64 वर्षीय कुसुम झरबड़े का कहना है कि वे पिछले सात वर्षों से न्याय की उम्मीद में प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर लगा रही हैं और चाहती हैं कि राजस्व रिकॉर्ड, न्यायालयीन आदेशों और वास्तविक स्थिति के आधार पर विवाद का अंतिम समाधान किया जाए।

Shabd Agni
Author: Shabd Agni

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