हार्वेस्टर का रजिस्ट्रेशन न करने पर डीलर और कंपनी पर 2 लाख का जुर्माना
कड़ा रुख: 3 महीने में रजिस्ट्रेशन न देने पर डीलर और कंपनी को भुगतनी होगी भारी चपत; कोर्ट ने माना– ‘सेवा में घोर कमी’
शब्द अग्नि /दमोह ब्यूरो अनुराग बजाज, दमोह*
*दमोह।* जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग दमोह ने कृषि उपकरणों की खरीदी-बिक्री में होने वाली धोखाधड़ी और लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक पीड़ित किसान के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। आयोग ने हार्वेस्टर मशीन बेचने के बाद उसका रजिस्ट्रेशन न कराने को ‘सेवा में घोर कमी’ माना है।
उपभोक्ता कोर्ट के अध्यक्ष *ऋषभ कुमार सिंघई* एवं सदस्य *राजेश कुमार ताम्रकार* की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हार्वेस्टर डीलर और निर्माता कंपनी पर संयुक्त रूप से *2,00,000 रुपये (दो लाख रुपये) का भारी-भरकम जुर्माना* ठोंका है।
यह था पूरा मामला
रिकॉर्ड के अनुसार, पथरिया तहसील के ग्राम नेंगुवां निवासी किसान *मुकेश सिंह लोधी (उम्र 30 वर्ष)* ने अपने खेतों और व्यावसायिक उपयोग के लिए एक हार्वेस्टर मशीन खरीदी थी। इस मशीन के लिए बकायदा ‘इफ्को किसान फाइनेंस लिमिटेड’ से फाइनेंस भी कराया गया था।
* हार्वेस्टर की खरीदी दमोह के बांदकपुर स्थित *’इंद्रा मोटर्स’ के डीलर अमित जैन* के माध्यम से हुई थी, जबकि मशीन का निर्माण पंजाब की नामचीन कंपनी *’प्रीत एग्रो इंडस्ट्री प्राइवेट लिमिटेड’* द्वारा किया गया था।
* मशीन खरीदने के बाद डीलर और कंपनी की जिम्मेदारी उसका आरटीओ (RTO) रजिस्ट्रेशन कराने की थी।
* लेकिन महीनों चक्कर काटने के बाद भी जब किसान को हार्वेस्टर (इंजन नं. HJKM406638, चेचिस नं. PTC120226358) का रजिस्ट्रेशन नहीं मिला, तो वह मशीन का उपयोग नहीं कर पा रहा था। थक-हारकर पीड़ित किसान ने अधिवक्ता धर्मेंद्र तिवारी के माध्यम से उपभोक्ता फोरम में न्याय की गुहार लगाई।
डीलर कोर्ट से रहा नदारद, कंपनी की दलीलें खारिज
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि बांदकपुर का डीलर अमित जैन (इंद्रा मोटर्स) जानबूझकर सुनवाई से नदारद रहा, जिसके चलते उसके खिलाफ मामला एकपक्षीय चलाया गया। वहीं प्रीत एग्रो कंपनी ने अपने बचाव में कई दलीलें दीं, जिन्हें कोर्ट ने ‘प्रोडक्ट लायबिलिटी’ के सिद्धांतों के तहत खारिज कर दिया। आयोग ने माना कि हार्वेस्टर जैसी महंगी कृषि मशीन का एक महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन न कराना उपभोक्ता के अधिकारों का खुला हनन है।
उपभोक्ता फोरम का कड़ा और दो-टूक आदेश:
आयोग के अध्यक्ष ऋषभ कुमार सिंघई ने अपने आदेश में डीलर और कंपनी को घेरते हुए दो टूक फैसला सुनाया है:
1. *3 महीने की समयसीमा:* डीलर (अमित जैन) और प्रीत एग्रो कंपनी आदेश जारी होने के *3 महीने के भीतर* हर हाल में हार्वेस्टर का आरटीओ रजिस्ट्रेशन कराकर किसान मुकेश लोधी को सौंपें।
2. *लापरवाही पर ₹2 लाख का हर्जाना:* यदि डीलर और कंपनी 3 महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन कराने में नाकाम रहते हैं, तो अवधि बीतने के बाद *डीलर अमित जैन को ₹1,00,000 (एक लाख)* और *प्रीत एग्रो कंपनी को ₹1,00,000 (एक लाख)* यानी कुल 2 लाख रुपये की राशि मानसिक क्षतिपूर्ति, टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क के मद में किसान को चुकानी होगी।
3. *समय पर काम करने पर राहत:* कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि वे 3 महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन कराकर दे देते हैं, तो उन्हें जुर्माने में रियायत मिलेगी और सेवा में विलंब के हर्जाने के रूप में दोनों को ₹25,000-₹25,000 (कुल 50 हजार रुपये) किसान को देने होंगे।
किसानों और उपभोक्ताओं के लिए नजीर बना फैसला
> इस बड़े फैसले के बाद जिले के किसान संगठनों में खुशी की लहर है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह फैसला उन डीलरों और कंपनियों के लिए एक कड़ा सबक है जो गाड़ी बेचने के बाद भोले-भाले किसानों को आरटीओ रजिस्ट्रेशन और कागजी कार्यवाहियों के लिए महीनों तक दफ्तरों के चक्कर कटवाते हैं।
Author: Shabd Agni
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