सुनवाई नहीं तो होगा अनशन
ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना से नाराज स्थानीय ,, दिन में मांगें पूरी नहीं हुईं तो अनिश्चितकालीन धरना, अनशन और जनसभा की चेतावनी
शब्द अग्नि/आशीष बृजेश द्विवेदी
सिंगरौली/ ललितपुर-सिंगरौली रेल लाइन परियोजना से प्रभावित सैकड़ों परिवार अब अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए आंदोलन की राह पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। बंधा कोल परियोजना प्रभावित ग्रामीणों के बाद अब रेल परियोजना से जुड़े गांवों के लोगों ने भी पुनर्वास, पुनर्स्थापन और लंबित मुआवजा संबंधी मांगों को लेकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
प्रभावित ग्रामीणों ने देवसर एसडीएम, तहसीलदार एवं थाना प्रभारी जियावन को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर उनकी मांगों का निराकरण नहीं किया गया तो ग्राम खोभा में शांतिपूर्ण अनिश्चितकालीन धरना, आमरण अनशन एवं जनसभा का आयोजन किया जाएगा। आंदोलन के दौरान ध्वनि विस्तारक यंत्रों का भी उपयोग किया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि ललितपुर-सिंगरौली रेल लाइन परियोजना से लगभग दो दर्जन गांवों के सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए हैं। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुए करीब नौ वर्ष और अवार्ड पारित हुए छह वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद बड़ी संख्या में पात्र परिवारों को पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के वैधानिक लाभ नहीं मिल सके हैं।
रोजगार या पांच लाख रुपये की मांग
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि भूमि अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम-2013 की दूसरी अनुसूची के तहत पात्र प्रभावित परिवारों को रोजगार अथवा उसके स्थान पर देय पांच लाख रुपये की सहायता राशि का भुगतान नहीं किया गया है। इसके अलावा वर्षों से शासकीय भूमि पर निवासरत वास्तविक प्रभावित परिवारों को भी मुआवजा और पुनर्वास लाभों से वंचित रखा गया है।
पर्यावरणीय नुकसान का भी उठाया मुद्दा
ग्रामीणों ने परियोजना निर्माण से जुड़े पर्यावरणीय पहलुओं को भी गंभीर चिंता का विषय बताया है। उनका कहना है कि रेल लाइन निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की गई है और आगे भी वृक्षों के कटान का प्रस्ताव है। ऐसे में प्रशासन सार्वजनिक रूप से यह जानकारी उपलब्ध कराए कि काटे गए तथा प्रस्तावित वृक्षों के बदले प्रतिपूरक वृक्षारोपण कहां, कितने क्षेत्र में और कितने पौधों के रूप में किया गया है।
धूल प्रदूषण से ग्रामीण परेशान
ज्ञापन में निर्माण कार्यों के कारण फैल रहे धूल प्रदूषण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रभावित गांवों में लगातार उड़ रही धूल से आमजन, विद्यार्थी, बुजुर्ग और पशुधन गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि निर्माण मार्गों एवं प्रभावित क्षेत्रों में नियमित रूप से पानी का छिड़काव कराया जाए ताकि प्रदूषण पर नियंत्रण किया जा सके।
कई परिवार वैधानिक मुआवजे से वंचित
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अनेक प्रभावित परिवारों के मकान, कुएं, बाउंड्रीवॉल, वृक्ष, कृषि संरचनाएं तथा अन्य स्थायी परिसंपत्तियां वास्तविक स्थिति के बावजूद अवार्ड में शामिल नहीं की गईं। इसके कारण वे वैधानिक मुआवजे से वंचित रह गए हैं। प्रभावितों ने ऐसे सभी मामलों का पुनः सर्वेक्षण कर अलग से अवार्ड पारित करने और पूर्ण मुआवजा भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है।
कई अधिकारियों को भेजी गई प्रतिलिपि
ग्रामीणों ने आंदोलन के दौरान सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी अनुरोध किया है। ज्ञापन की प्रतिलिपि कलेक्टर सिंगरौली, रीवा संभाग आयुक्त, पुलिस अधीक्षक, आईजी रीवा रेंज, एसडीओपी देवसर, पश्चिम मध्य रेलवे के अधिकारियों, भूमि अर्जन एवं पुनर्वास अधिकारी तथा ग्राम पंचायत नौढ़िया आबाद को भी भेजी गई है।
ग्रामीणों का अल्टीमेटम
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो प्रभावित परिवार व्यापक जनसमर्थन के साथ आंदोलन शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और परियोजना प्रबंधन की होगी।
Author: Shabd Agni
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