शब्द अग्नि / सचिन जैन
लेख : ओंकारसिंह राजपूत
बैतूल / हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। यह दिन हमें प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को समझने और पर्यावरण संरक्षण के लिए संकल्प लेने की प्रेरणा देता है। आज जब पूरी दुनिया प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन जैसी समस्याओं से जूझ रही है, तब पर्यावरण संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि मानव जीवन की आवश्यकता बन गया है।
21वीं सदी में पर्यावरण सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों में से एक है। विकास की दौड़ में हम प्रकृति से लगातार दूर होते जा रहे हैं। बढ़ते उद्योग, वाहनों का धुआं, प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई ने पृथ्वी के प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित किया है। इसका परिणाम असामान्य मौसम, बढ़ता तापमान, जल संकट और प्राकृतिक आपदाओं के रूप में हमारे सामने दिखाई दे रहा है।
प्रकृति मानव जीवन की आधारशिला है। हमें शुद्ध वायु, स्वच्छ जल, भोजन और जीवन के लिए आवश्यक सभी संसाधन प्रकृति से ही प्राप्त होते हैं। यदि प्रकृति सुरक्षित रहेगी, तभी मानव सभ्यता का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा। इसलिए पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है।
वृक्ष प्रकृति के सबसे बड़े उपहार हैं। एक वृक्ष न केवल हमें ऑक्सीजन प्रदान करता है, बल्कि मिट्टी का संरक्षण करता है, वर्षा चक्र को संतुलित बनाए रखता है, भूजल स्तर बढ़ाने में मदद करता है और असंख्य जीव-जंतुओं को आश्रय देता है। एक पेड़ अपने जीवनकाल में जितना योगदान देता है, उसकी तुलना किसी भी भौतिक संसाधन से नहीं की जा सकती। यही कारण है कि वृक्षारोपण को पर्यावरण संरक्षण का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है।
Author: Shabd Agni
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