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संस्कार,विज्ञान,चरित्र का समन्वय ही शिक्षा- दुबे

विद्या विहार में आचार्य अभ्यास वर्ग के द्वितीय दिवस पर शिक्षा की वर्तमान चुनौतियों पर हुआ मार्गदर्शन

शब्द अग्नि / ऋषभ सेन

बैरसिया/ सरस्वती शिशु/विद्या मंदिर, विद्या विहार बैरसिया में आयोजित आचार्य अभ्यास वर्ग प्रशिक्षण के द्वितीय दिवस का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं वंदना-प्रार्थना के साथ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं विषय प्रस्तोता अर्जुन शिक्षा समिति बैरसिया के व्यवस्थापक दीपक दुबे ने “शिक्षा की वर्तमान चुनौतियां एवं हमारी भूमिका” विषय पर आचार्यों का मार्गदर्शन किया।अपने उद्बोधन में श्री दुबे ने कहा कि शिक्षा का विषय केवल शिक्षक और विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज और राष्ट्र के भविष्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि “सा विद्या या विमुक्तये” अर्थात जो अज्ञान के अंधकार से मुक्त करे, वही वास्तविक शिक्षा है। शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण का सशक्त आधार है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मनुष्य को संस्कारित, जागरूक एवं जिम्मेदार नागरिक बनाती है। वर्तमान समय में नई पीढ़ी को विज्ञान एवं तकनीक के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। जो समाज अपनी संस्कृति और संस्कारों को भूल जाता है, उसका भविष्य भी कमजोर हो जाता है।

 

Shabd Agni
Author: Shabd Agni

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