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भ्रष्टाचार के विरुद्ध पर्यवेक्षकों की लामबंदी

विभिन्न विभागों में भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षकों ने जताई नाराजगी

शब्द अग्नि मनोज जैन कलाकार

अशोकनगर। जिले में विभिन्न विभागों में लगातार सामने आ रहे भ्रष्टाचार के मामलों पर ठोस कार्रवाई न होने को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग की महिला सुपरवाइजरों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। शुक्रवार को जिले की सुपरवाइजरों ने भ्रष्टाचार से संबंधित समाचारों की प्रदर्शनी लगाकर अनोखे ढंग से अपना विरोध दर्ज कराया और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए। बीती 1 मई 2026 से 10 जून 2026 तक विभिन्न समाचार पत्रों में 200 से अधिक भ्रष्टाचार से जुड़े समाचार प्रकाशित हुए हैं लेकिन अधिकांश मामलों में केवल जांच जारी है ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे विभाग की महिला कर्मचारियों में असंतोष और आक्रोश की स्थिति बन रही है। महिला सुपरवाइजरों ने आरोप लगाया कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यरत कार्यकर्ताओं द्वारा मनमानी की जा रही है।

कई स्थानों पर केंद्रों का संचालन नियमित रूप से नहीं हो रहा है वहीं कुछ जगहों पर शासकीय भवनों का उपयोग अन्य कार्यों जैसे दुकान संचालन के लिए किया जा रहा है हितग्राहियों को लाभ नहीं दिया जा रहा है अगर हम कार्यवाही करने की कोशिश करते हैं तो ड्रामेबाजी की जाती है जब सुपरवाइजर इन मामलों में हस्तक्षेप करती हैं तो उन पर दबाव बनाया जाता है। वहीं नोटिस प्राप्त पर्यवेक्षक रजनी बालू ने आरोप लगाया कि गहोरा गांव के एक स्वसहायता समूह को बहाल कराने के लिए उन पर दबाव बनाया गया। उन्होंने कहा कि समूह के संचालन में गंभीर कमियां थीं, जिन्हें कलेक्टर के निरीक्षण में भी पाया गया था। इसके बावजूद कार्रवाई न करने के लिए दबाव और धमकियां दी जा रही है कि अगर आप हमारे गहोरा स्वसहायता समूह को हटाती हो तो हम आपके खिलाफ झूठी शिकायतें करके आपको यहां से हटवा देंगे। मैंने नियमानुसार कत्र्तव्य से जो मेरे दायित्व थे मैंने इनके समूह को हटवाया जैसे गहोरा, भर्रोली बमनावर। दोनों समूहों को मैंने समिति में रखकर अध्यक्ष महोदय एसडीएम की अध्यक्षता में हटवाए। उसी समय से मेरे ऊपर बार-बार दबाव बनाया जा रहा है जैसे राजनैतिक फोन आना और समूह को बहाल कर दो हम आपको ऐसा उलझाएंगे कि आप निकल नहीं पाओगी। महिला कर्मचारियों ने सवाल उठाया है कि क्या केवल शिकायत के आधार पर बिना पूर्ण जांच के निलंबन उचित है। उन्होंने मांग की है कि जब तक किसी मामले में जांच पूर्ण न हो जाए तब तक संबंधित कर्मचारियों को बहाल किया जाए और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।

केन्द्र पर संचालित हो रही थी दुकान-
ईसागढ़ की महिला पर्यवेक्षक चंचल अहिरवार ने भी अपने खिलाफ शिकायतों को दुर्भावनापूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सरकारी भवन में परिवार सहित रह रही थी और वहीं दुकान भी चला रही थी, जिसकी जानकारी अधिकारियों को दी गई थी। अहिरवार ने आरोप लगाया कि उनके द्वारा कार्रवाई की अनुशंसा करने के बाद उनके खिलाफ झूठी शिकायतें कराई गईं। सुपरवाइजरों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर उनका पक्ष सुने जाने तथा भेदभावपूर्ण कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है।

Shabd Agni
Author: Shabd Agni

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