गोचर भूमि पर भू-माफियाओं का कब्जा, सडक़ों पर तड़प रहा गौवंश,
शब्द अग्नि मनोज जैन कलाकार
अशोकनगर। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में शासकीय और सार्वजनिक भूमियों पर भू-माफियाओं के हौंसले बुलंद हैं। ताजा मामला जिले के ग्रामीण क्षेत्रों का है जहां मवेशियों के चरने के लिए आरक्षित बहुमूल्य गौचर और गौशाला की शासकीय भूमि पर रसूखदारों द्वारा अवैध रूप से कब्जा करने का संगीन मामला सामने आया है। इस संबंध में ग्राम सहोदरी के जागरूक नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता राजू ओझा भगत जी ने मंगलवार को ग्रामीणों की ओर से कलेक्टर को जनसुनवाई में एक शिकायती पत्र सौंपकर भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने और शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है।
रसूखदारों ने किया पक्का निर्माण और कर रहे खेती-
कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन में बताया गया है कि राजस्व अभिलेखों में दर्ज शासकीय गौचर और गौशाला की सुरक्षित भूमि पर गांव के ही कुछ रसूखदार और असामाजिक तत्वों ने पिछले लंबे समय से अवैध कब्जा कर रखा है। इन अतिक्रमणकारियों ने न सिर्फ शासकीय भूमि पर कंटीले तारों की फैंसिंग कर ली है बल्कि वहां कच्चे-पक्के निर्माण कर धड़ल्ले से खेती भी की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि जब कोई इन अवैध कब्जों का विरोध करता है तो अतिक्रमणकारी विवाद करने पर उतारू हो जाते हैं और उन्हें डराने-धमकाने व झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देते हैं। शिकायतकर्ता राजू ओझा ने प्रशासनिक सुस्ती पर सवाल उठाते हुए कहा कि शासकीय भूमि पर इस तरह का अवैध कब्जा ग्राम पंचायतों की गोचर, तालाब और सार्वजनिक उपयोग की भूमियों से किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे को हटाना स्थानीय प्रशासन की वैधानिक जिम्मेदारी है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर भू-माफियाओं के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
बेसहारा गौवंश भुखमरी और दुर्घटनाओं का शिकार-
गौचर भूमि पर अवैध कब्जे का सबसे दर्दनाक असर बेसहारा गौवंश पर पड़ रहा है। मवेशियों के लिए चरने की जगह न बचने के कारण गौमाता सडक़ों पर भटकने को मजबूर हैं। हरी घास न मिलने से गाय भूख के कारण कचरा और पॉलीथिन खाने को विवश हैं, जिससे वे अकाल मृत्यु का ग्रास बन रही हैं। इसके साथ ही सडक़ों पर बैठे गौवंश की आए दिन गंभीर सडक़ दुर्घटनाएं भी हो रही हैं।
टीम गठित कर सीमांकन और एफआईआर की मांग-
ग्रामवासियों की ओर से कलेक्टर से जनसुनवाई में मांग की गई है कि ऐसे गंभीर मामलों पर तत्काल संज्ञान लिया जाए। ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार, आरआई और पटवारी की एक विशेष राजस्व टीम गठित कर भूमि का तत्काल सीमांकन कराया जाए। सीमांकन के बाद शासकीय भूमि को अतिक्रमणकारियों के चंगुल से पूर्णत: मुक्त कराकर शासन के नियंत्रण में लिया जाए।
Author: Shabd Agni
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