बोला… “नाम बताया तो जबलपुर पहुंचने से पहले हत्या हो जाएगी”
शब्द अग्नि अनुराग बजाज
दमोह। सुबह तड़के जब अधिकांश लोग गहरी नींद में सो रहे थे, उसी वक्त दबंगों के खौफ से सहमा एक बुजुर्ग अपनी फरियाद लेकर जिला मुख्यालय की ओर पैदल निकल पड़ा। भूखा-प्यासा करीब 35 किलोमीटर का सफर तय कर वह दमोह की जनसुनवाई में पहुंचा, ताकि कलेक्टर को अपनी आपबीती सुना सके। यह पूरा मामला बंदरकोला गांव का है, जो प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के विधानसभा क्षेत्र में आता है। ऐसे में मंत्री के क्षेत्र से एक बुजुर्ग का अपनी सुरक्षा के लिए पैदल जिला मुख्यालय तक पहुंचना स्थानीय कानून व्यवस्था और ग्रामीण सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जनसुनवाई में पहुंचे वृद्ध किशोरी लाल साहू ने कलेक्टर प्रताप नारायण यादव को बताया कि गांव के कुछ प्रभावशाली लोग उनके साथ मारपीट कर रहे हैं और उन्हें अपना सामान तक ले जाने नहीं दे रहे। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल संबंधित थाना प्रभारी को कार्रवाई के निर्देश दिए। वृद्ध को भोजन कराया गया और जबेरा के नायब तहसीलदार को उनके साथ गांव भेजने के निर्देश दिए, ताकि प्रशासनिक सुरक्षा में वह अपना सामान लेकर अपने बेटे के पास जबलपुर जा सकें।
जनसुनवाई के बाद मीडिया से चर्चा में किशोरी लाल साहू ने बताया कि उनका बेटा जबलपुर में रहता है और अब वे भी हमेशा के लिए वहीं बसना चाहते हैं। उनका आरोप है कि गांव में उनके पुराने मकान से चोरी हो चुकी है। चोरी में मक्का, गेहूं, दाल, चावल, सोने-चांदी के जेवर, घरेलू बर्तन और करीब 32 हजार रुपये नकद ले जाए गए। इसके बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला। अब वह अपने पुराने मकान में लगी कीमती सागौन की लकड़ी निकालकर जबलपुर में बन रहे अपने नए घर में उपयोग करना चाहते हैं, लेकिन गांव के कुछ दबंग उन्हें ऐसा करने से रोक रहे हैं। सबसे गंभीर बात तब सामने आई जब वृद्ध ने कहा कि वह आरोपियों के नाम जानता है, लेकिन अभी उनका खुलासा नहीं कर सकता। उनका कहना था, “अगर मैंने अभी नाम बता दिए तो मैं जबलपुर नहीं पहुंच पाऊंगा, रास्ते में ही मेरी हत्या कर दी जाएगी।” एक बुजुर्ग का यह बयान केवल उसकी पीड़ा नहीं, बल्कि गांव में व्याप्त भय के माहौल की भयावह तस्वीर पेश करता है।
अब सवाल केवल एक वृद्ध को सुरक्षित जबलपुर पहुंचाने का नहीं है। सवाल यह भी है कि आखिर ऐसा कौन सा डर है जिसने एक बुजुर्ग को सुबह चार बजे भूखा-प्यासा 35 किलोमीटर पैदल चलने पर मजबूर कर दिया और फिर भी वह कथित आरोपियों का नाम लेने से डर रहा है। कलेक्टर के निर्देशों के बाद अब निगाहें प्रशासन पर हैं कि वह न केवल वृद्ध की सुरक्षा सुनिश्चित करे, बल्कि चोरी, मारपीट और सामान ले जाने से रोकने जैसे आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई भी करे। तभी इस जनसुनवाई का वास्तविक उद्देश्य पूरा माना जाएगा।
Author: Shabd Agni
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