नस्ल सुधार एवं कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रमों में जिला प्रथम रैंकिंग पर
शब्द अग्नि/ सीमान्त राव बन्सोड़ बालाघाट । पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा संचालित महत्वाकांक्षी ‘लखपति गौ-पालक दीदी योजना’ के अंतर्गत बालाघाट जिले ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। नस्ल सुधार आधारित इस ग्रामीण आय संवर्धन मॉडल का उद्देश्य दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पशुपालकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि करना है। कलेक्टर श्री मृणाल मीना द्वारा सतत समीक्षा किए जाने से यह उपलब्धि हासिल हुई है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने के लक्ष्य के अनुरूप पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा यह योजना प्रारंभ की गई है। योजना का मूल मंत्र “शून्य पूँजीगत निवेश, अधिकतम आनुवंशिक एवं आर्थिक लाभ” है। इसके अंतर्गत अवर्णित गाय एवं भैंसों का उच्च नस्ल के वीर्य (HGM Bull, Conventional एवं Sexed Semen) से कृत्रिम गर्भाधान कराकर उन्नत नस्ल की बछिया एवं पड़िया तैयार की जाती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार इन उन्नत नस्ल की संतानों से भविष्य में दुग्ध उत्पादन में लगभग ढाई गुना तक वृद्धि की संभावना रहती है। एक बछिया अथवा पड़िया के जीवनकाल में पशुपालक को लगभग 3 से 4 लाख रुपये का अतिरिक्त लाभ प्राप्त हो सकता है। यदि किसी परिवार के पास 3 से 4 ऐसी उन्नत पशु संतानें हों तो उनकी आय 10 लाख रुपये से अधिक तक पहुंच सकती है, जिससे “लखपति गौ-पालक दीदी” की अवधारणा साकार होगी।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार हिरण्यगर्भा योजना अंतर्गत संचालित विभिन्न गतिविधियों में भी बालाघाट जिले का प्रदर्शन प्रदेश में सर्वश्रेष्ठ रहा है। जिले ने अवर्णित पशुओं में 58 प्रतिशत कृत्रिम गर्भाधान कर प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा कुल कृत्रिम गर्भाधान में 67 प्रतिशत उपलब्धि, अक्रियाशील मैत्री गौसेवकों से 66 किटों की वापसी, 1756 सेक्स सॉर्टेड सीमन स्ट्रॉ (SSS) का उपयोग, AVFO द्वारा 96 कृत्रिम गर्भाधान, क्षीरधारा ग्रामों में 277 शिविरों का आयोजन तथा एफएमडी टीकाकरण अभियान के सातवें चरण में 67.51 प्रतिशत टीकाकरण जैसी उपलब्धियां भी जिले के खाते में दर्ज हुई हैं।
Author: Shabd Agni
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