पुराने बिलों के ₹2.25 करोड़ आए, नए कामों में ₹1.39 करोड़ फूंकने पर बवाल
शब्द अग्नि / अनुराग बजाज दमोह जनपद पंचायत इन दिनों मनरेगा (MNREGA) योजना में नियम-कायदों को ताक पर रखकर वित्तीय मनमानी करने का सबसे बड़ा केंद्र बन चुकी है। बजट आवंटन में चहेती पंचायतों पर मेहरबानी और ‘बिना लोकेशन’ हाजिरी के घोटालों के बाद, अब एक ऐसा सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है जिसने सीधे मध्य प्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद के आयुक्त अवि प्रसाद के आदेश और दमोह जनपद के प्रभारी सीईओ हलधर मिश्रा की कार्यशैली को आमने-सामने लाकर खड़ा कर दिया है।
राशि की कर दी बंदरबांट
आरोप है कि राज्य परिषद ने जिन वर्षों से लंबित पुराने सामग्री बिलों के भुगतान के लिए करोड़ों रुपये जारी किए थे, उन्हें दरकिनार कर वर्ष 2026 में शुरू हुए नए निर्माण कार्यों के सामग्री बिलों की बंदरबांट कर दी गई महा खुलासा राज्य परिषद के कड़े निर्देशों को दमोह जनपद में ठेंगा; ‘एक बगिया मां के नाम’ को दरकिनार कर चहेती पंचायतों के 2026 के बिल किए पास, जिला पंचायत सीईओ ने दिए जांच के निर्देश
यह है करोड़ों के आंकड़ों का पूरा गणित और ‘आदेश
अखबार की खोजी पड़ताल और आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, दमोह जनपद में मनरेगा भुगतान का संकट लंबे समय से चल रहा था: अक्टूबर 2025 की स्थिति: 10 अक्टूबर 2025 तक दमोह जनपद में मनरेगा के 3 करोड़ 58 लाख 24 हजार रुपये के सामग्री बिल लंबित थे। उस समय परिषद से महज 65 लाख रुपये मिले, जिससे 2 करोड़ 93 लाख 24 हजार रुपये का पुराना बकाया अटका रह गया। आयुक्त का पत्र क्रमांक 851:इन्हीं पुराने देयकों को चुकता करने के लिए 15 मई 2026 को आयुक्त अवि प्रसाद के हस्ताक्षर से 2 करोड़ 25 लाख 18 हजार रुपये का विशेष बजट दमोह जनपद को भेजा गया।
आयुक्त अवि प्रसाद का कड़ा निर्देश क्या था
आयुक्त ने अपने आदेश में स्पष्ट और दो-टूक लिखा था कि यह राशि 15 मई 2025 की स्थिति में लंबित सामग्री देयकों के लिए ही उपयोग होगी। इसमें भी सबसे पहली प्राथमिकता एक बगिया मां के नाम” योजना और उसके बाद “जल गंगा संवर्धन अभियान” के लंबित बिलों को दी जानी थी। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि निर्देशों का उल्लंघन करने वाले भुगतानकर्ता अधिकारी पर दंडात्मक कार्रवाई होगी।
निर्देश धरे रह गए, चहेती पंचायतों में बहा दी ‘गंगा
आरोप है कि दमोह जनपद पंचायत में राज्य स्तर के इन कड़े निर्देशों और कटऑफ तारीख को सरेआम रद्दी की टोकरी में फेंक दिया गया। आयुक्त के आदेश के विपरीत, **1 करोड़ 39 लाख 43 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि** ऐसे नए निर्माण कार्यों के सामग्री बिलों पर खर्च कर दी गई, जिनकी शुरुआत ही वर्ष 2026 में हुई थी।
लाभार्थी पंचायतें एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरीं हथना, रियाना, जमुनिया हजारी, सुहेला, दतला, अधरौटा और बम्हौरी जैसी चुनिंदा पंचायतों में वर्ष 2026 के बिलों का धड़ल्ले से भुगतान कर दिया गया। सालों से राशि रुकी सप्लायर परेशान जबकि परिषद की मूल मंशा उन छोटे सप्लायरों और हितग्राहियों को राहत देने की थी, जिनके बिल सालों से जनपद के चक्कर काट रहे थे।
वॉर ऑफ वर्ड्स: अधिकारियों के विरोधाभासी बयान
जब इस गंभीर वित्तीय विसंगति पर सवाल उठाए गए, तो जिम्मेदार अधिकारियों के बयानों ने मामले को और संदेहास्पद बना दिया: प्रभारी सीईओ हलधर मिश्रा की दलील पत्र में वर्ष 2025-26 के लंबित बिलों का भुगतान करने का उल्लेख है और उसी के अनुसार नियमानुसार भुगतान किया गया है।
शिकायतकर्ताओं का पलटवार:
शिकायतकर्ताओं ने पुख्ता डिजिटल सबूत पेश करते हुए दावा किया है कि जिन कार्यों का भुगतान हुआ, उनकी सामग्री, मस्टर, निर्माण की शुरुआत और यहाँ तक कि बिलों के ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज होने की तारीख भी **वर्ष 2026 के महीनों की है**। ऐसे में 2025 की कटऑफ डेट वाले बजट से इनका भुगतान कैसे संभव हुआ?
जिला पंचायत सीईओ प्रवीण फुलपगारे ने कहा– “जांच की जाएगी
इस पूरे महा-फर्जीवाड़े और आयुक्त के आदेश की अवहेलना का मामला जब जिला पंचायत सीईओ प्रवीण फुलपगारे के संज्ञान में लाया गया, तो उन्होंने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए दो-टूक कहा कि– “मामला संज्ञान में आया है, इसकी विस्तृत तकनीकी जांच कराई जाएगी अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और राज्य रोजगार गारंटी परिषद इस ‘वित्तीय अनुशासनहीनता’ के मास्टरमाइंड्स पर क्या कानूनी चाबुक चलाती है, या फिर करोड़ों रुपये के इस गंभीर विवाद को भी हमेशा की तरह फाइलों की दराज में दफन कर दिया जाएगा।
शब्द अग्नि के तीखे सवाल
1. प्रभारी सीईओ हलधर मिश्रा ने जब आयुक्त अवि प्रसाद का आदेश 15 मई 2025 के पूर्व के लंबित बिलों (विशेषकर ‘एक बगिया मां के नाम’) के लिए था, तो वर्ष 2026 में शुरू हुए कार्यों के बिलों को किस ‘विशेष आशीर्वाद’ के तहत पास किया गया?
2. जिन पंचायतों (हथना, रियाना, दतला) पर पहले से ही बजट असंतुलन और घोटालों के आरोप हैं, नियमों को बाईपास करके उन्हीं को ₹1.39 करोड़ का त्वरित भुगतान क्यों किया गया?
3. क्या दमोह जनपद पंचायत में राज्य रोजगार गारंटी परिषद के आदेशों से ऊपर स्थानीय अधिकारियों की ‘पसंद-नापसंद’ और वित्तीय साठगांठ का नियम चलता है?
शब्द अग्नि का बड़ा खुलासा
अपने पाठकों को पूर्व में प्रकाशित समाचार के साथ ही यह कहा गया था कि जल्द ही इस मामले में शब्द अग्नि आगे ओर खुलासा करेगा इस पूरे कथित भुगतान की परते धीरे धीरे खुलते जा रही है है अपने पाठकों को अगले अंक में इस कथित भुगतान कॉन्लेकर पुनः बड़ा खुलासा करेंगे
Author: Shabd Agni
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