प्रोफेसर-वैज्ञानिक, रिसर्चर और अधिकारी पहुंचे पिपलिया सलारसी
डॉ. राजकुमार मालवीय बोले- नरवाई, गोबर और कचरे को संसाधन बनाकर रोजगार के अवसर तैयार करें, दूधी नदी संरक्षण पर भी दिया जोर
शब्द अग्नि / हिमालय गोहिया
जावर, पिपलिया सलारसी ग्राम पंचायत में चल रहे पांच दिवसीय विज्ञान एवं तकनीक आधारित प्रशिक्षण के समापन अवसर पर प्रोफेसर, वैज्ञानिक, रिसर्चर और अधिकारी पहुंचे। यहां ग्रामीण संसाधनों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर रोजगार और आय के नए अवसर विकसित करने पर मंथन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य संयोजक वैज्ञानिक एवं पर्यावरणविद् डॉ. राजकुमार मालवीय ने कहा कि गांव में उपलब्ध नरवाई, गोबर और जैविक कचरे को बेकार समझने के बजाय उत्पादन का कच्चा माल माना जाए। वैज्ञानिक प्रसंस्करण से यही संसाधन ऊर्जा और रोजगार का आधार बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में तकनीक तभी सफल होगी, जब वह स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल और आर्थिक रूप से व्यवहारिक हो। किसी भी यूनिट की शुरुआत से पहले कच्चे माल की उपलब्धता, लागत, ऊर्जा, उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता और बाजार का आकलन जरूरी है। इससे तकनीक को केवल प्रशिक्षण तक सीमित रखने के बजाय स्थायी उद्यम में बदला जा सकता है।
नरवाई से ब्रिकेट और पैलेट्स की संभावनाएं
विषय विशेषज्ञ डॉ. राज सुमन भारद्वाज ने ब्रिकेटिंग, गोबर आधारित उत्पादन, चारकोल, नरवाई, पैलेट्स और गौकाष्ठ के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कृषि अवशेषों को जलाने से होने वाले नुकसान को कम करते हुए इन्हें उपयोगी ईंधन उत्पादों में बदला जा सकता है।
डॉ. राहुल कुमार ने गोबर, पत्तियों, जैविक कचरे, नरवाई और गाजर घास से बायोगैस व मीथेन उत्पादन की संभावनाओं को समझाया। उन्होंने जैविक संसाधनों से ऊर्जा तैयार करने की प्रक्रिया और इसके ग्रामीण उपयोग पर चर्चा की।
दूधी नदी संरक्षण को विकास से जोड़ने पर जोर
प्रशिक्षण में दूधी नदी संरक्षण एवं संवर्धन को भी प्रमुख विषय बनाया गया। डॉ. मालवीय ने कहा कि नदी को बचाने के लिए गांव स्तर पर कचरे और अपशिष्ट का प्रबंधन जरूरी है। यदि जैविक कचरे का उपयोग खाद या ऊर्जा उत्पादन में हो और प्लास्टिक सहित अन्य अपशिष्ट का उचित निस्तारण किया जाए तो जलस्रोतों पर दबाव कम किया जा सकता है। ग्रामीण सहभागिता को नदी संरक्षण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताया गया।
योजनाओं और प्रचार-प्रसार पर जानकारी
कृष्णकांत मिश्रा ने ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं और उनके उपयोग की संभावनाओं पर जानकारी दी। अर्जुन सिंह ने योजनाओं और तकनीकी गतिविधियों के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती पूजन से हुई। अल्केश ने अतिथियों का स्वागत किया।
मुख्य अतिथि मेहरबान सिंह रहे। पूर्व सरपंच तेजसिंह ने क्षेत्र में नरवाई आधारित प्रोडक्शन यूनिट स्थापित करने की इच्छा जताई। ग्राम पंचायत सरपंच सोभाल सिंह पटेल ने प्रशिक्षण से जुड़े विशेषज्ञों, अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
एमपी काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के सहयोग से मां हिंगलाज सेवा समिति द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण में युवाओं को अपशिष्ट प्रबंधन, कम्पोस्टिंग, वर्मी कम्पोस्ट, ब्रिकेटिंग, बायोगैस, प्लास्टिक प्रबंधन और नदी संरक्षण की व्यावहारिक जानकारी दी गई।
Author: Shabd Agni
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