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June 13, 2026 2:51 am

आरईएस कार्यालय में हंगामे पर बढ़ी कार्रवाई

कर्मचारी से गाली-गलौज और धमकी के आरोप में एफआईआर दर्ज कराने पुलिस को लिखा पत्र

शब्द अग्नि अनुराग बजाज

दमोह। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) संभाग कार्यालय में शासकीय कर्मचारी के साथ कथित अभद्रता, गाली-गलौज और धमकी के मामले ने अब प्रशासनिक कार्रवाई का रूप ले लिया है। कर्मचारी राजीव लोचन चौबे की शिकायत के बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कोतवाली थाना प्रभारी को पत्र भेजकर आरोपी अमरदीप अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

कार्यालय कार्यपालन यंत्री द्वारा 12 जून 2026 को जारी पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि अमरदीप अग्रवाल ने कार्यालयीन समय में आरईएस कार्यालय पहुंचकर सहायक ग्रेड-3 राजीव लोचन चौबे के साथ अभद्र व्यवहार किया, गाली-गलौज की तथा शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न की। इतना ही नहीं, शिकायत में मारपीट की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया है। विभाग ने कर्मचारी के आवेदन को संज्ञान में लेते हुए पुलिस से विधिसम्मत कार्रवाई और प्रकरण दर्ज करने की मांग की है।

मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शिकायत की प्रतिलिपि कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भी भेजी गई है। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि विभाग इस घटनाक्रम को सामान्य विवाद नहीं मान रहा है।

पूर्व प्रभारी का करीबी है

सूत्रों की मानें तो आरोपी अमरदीप अग्रवाल को पूर्व प्रभारी कार्यपालन यंत्री मनोज गुप्ता का करीबी माना जाता रहा है। विभागीय गलियारों में चर्चा है कि मनोज गुप्ता के कार्यकाल के दौरान भी कई शिकायतें सामने आई थीं, जिनको लेकर समय-समय पर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। ऐसे में अब अमरदीप अग्रवाल का नाम सीधे एक शासकीय कर्मचारी को धमकाने और कार्यालयीन कार्य में व्यवधान डालने के आरोपों में सामने आने से चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

बाहरी हस्तक्षेप की गंभीर तस्वीर

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किस हैसियत से एक बाहरी व्यक्ति शासकीय कार्यालय में पहुंचकर कर्मचारियों पर दबाव बनाने और धमकी देने का साहस कर रहा था? यदि विभागीय कर्मचारियों के आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल एक व्यक्ति के दुर्व्यवहार का मामला नहीं, बल्कि सरकारी कार्यप्रणाली में बाहरी हस्तक्षेप की गंभीर तस्वीर भी पेश करता है।

अब निगाहें कोतवाली पुलिस पर टिकी हैं कि विभागीय पत्र और कर्मचारियों के सामूहिक समर्थन के बाद आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होती है या मामला सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाता है।

Shabd Agni
Author: Shabd Agni

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