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August 12, 2026 11:30 pm

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मूक-बधिर के दुष्कर्मों की जमानत निरस्त

शब्द अग्नि न्यूज़ । इंदौर। हाई कोर्ट ने जिला कोर्ट के फैसले को पलटते हुए मूक-बधिर युवती से दुष्कर्म करने वाले दुष्कर्मी की जमानत निरस्त कर दी। जिला कोर्ट ने यह कहते हुए दुष्कर्मी को जमानत दे दी थी कि आरोपित युवती को सहमति से ले गया था या बगैर सहमति के यह साक्ष्य का विषय है।

पीड़िता की ओर से जमानत निरस्त करने के लिए हाई कोर्ट में याचिका प्रस्तुत हुई थी। न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर ने मंगलवार को याचिका स्वीकारते हुए जिला कोर्ट के जमानत आदेश को निरस्त कर दिया। एडवोकेट शन्नो शगुफ्ता खान ने बताया कि एमआईजी पुलिस थाना क्षेत्र में रहने वाली 18 वर्ष 9 माह आयु की मूक-बधिर युवती से दो युवकों ने दुष्कर्म किया था। घटना 4 अप्रैल 2025 की है। आरोपित अनुसूचित जनजाति की इस मूक-बधिर युवती को सुबह 10 जबरन घर से उठाकर ले गए। उन्होंने उसके साथ गलत काम किया और बाद में उन्होंने उसे वापस घर पर छोड़ दिया। युवती के माता-पिता ने उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी। बाद में जब युवती घर पहुंची तो उसने सांकेतिक भाषा में घर वालों को बताया कि युवकों ने उसके साथ दुष्कर्म किया है।

बाद में पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार कर लिया जबकि दूसरा फरार हो गया था। घटना के दो माह बाद ही जिला कोर्ट ने आरोपित को जमानत दे दी थी। कोर्ट ने आरोपित की ओर से प्रस्तुत जमानत आवेदन को स्वीकारते हुए कहा था कि आरोपित युवती को सहमति से ले गए थे या सहमति के बगैर यह साक्ष्य का विषय है। एडवोकेट खान ने बताया कि युवती 50 प्रतिशत मदबुद्धि भी है। हमने जमानत का विरोध करते हुए जिला कोर्ट के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई थी लेकिन हमारी आपत्ति को दरकिनार करते हुए आरोपित को जमानत दे दी गई थी। हमने जमानत निरस्त करने के लिए हाई कोर्ट में याचिका प्रस्तुत की। न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर ने हमारी याचिका स्वीकारते हुए जिला कोर्ट द्वारा आरोपित को दी गई जमानत निरस्त कर दी।

Shabd Agni
Author: Shabd Agni

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