नालियों का गंदा पानी सडक़ों पर बहा रहा बीमारियों को न्योता
दैनिक शब्द अग्नि/ प्रकाश पटेल
खंडवा / पंधाना तहसील की सबसे समृद्ध और लाखों रुपए की सालाना आय वाली ग्राम पंचायत बोरगांव बुजुर्ग इन दिनों घोर प्रशासनिक उपेक्षा और गंदगी का शिकार है। स्वच्छ भारत अभियान और मुख्यमंत्री स्वच्छता अभियान के दावों को धता बताते हुए इस पंचायत के मुख्य मार्गों और गलियों में गंदगी का साम्राज्य फैला हुआ है। आलम यह है कि गाँव की नालियां पूरी तरह चोक हो चुकी हैं, जिसके कारण नालियों का बदबूदार और गंदा पानी सडक़ों के ऊपर बह रहा है। राहगीरों और स्थानीय निवासियों को इस कीचड़ और गंदे पानी के बीच से गुजरने को मजबूर होना पड़ रहा है।
सफाई के नाम पर सिर्फ कागजी बिल
ग्रामीणों का आरोप है कि गाँव में नियमित रूप से सफाई कर्मी कभी नहीं आते। नालियों की महीनों से सुध नहीं ली गई है, जिससे वे कचरे और गाद से पट चुकी हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि धरातल पर भले ही गंदगी पसरी हो, लेकिन ग्राम पंचायत में साफ-सफाई और नालियों के रखरखाव के नाम पर हर महीने लाखों रुपए के फर्जी बिल धड़ल्ले से निकाले जा रहे हैं। सरकारी खजाने की इस तरह खुलेआम चपत लगाई जा रही है और जिम्मेदार इस पर मौन साधे हुए हैं।
जिम्मेदारों की उदासीनता से आक्रोश
एक तरफ सरकार स्वच्छता को लेकर पानी की तरह पैसा बहा रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय सरपंच और सचिव की घोर उदासीनता के कारण जमीनी स्तर पर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। रुके हुए गंदे पानी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड जैसी गंभीर बीमारियों की दस्तक से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि उच्च अधिकारियों को इस भ्रष्टाचार और बदहाली की जांच कर, लापरवाह सरपंच-सचिव पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और गाँव को इस नारकीय स्थिति से मुक्ति दिलानी चाहिए।
Author: Shabd Agni
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