VISITORS

0 0 8 0 3 3

May 28, 2026 12:27 am

+91 8878812345

Explore

Search

May 28, 2026 12:27 am

कागजों पर कूलर हकीकत में उमस

ग्राम पंचायत उमरी में सरकारी बजट पर फिरा ‘बालाजी मार्केटिंग’ का पानी!

शब्द अग्नि / अनुराग बजाज/ दमोह

**दमोह।** भीषण गर्मी के इस दौर में जहां आम जनता पानी और ठंडी हवा के लिए तरस रही है, वहीं दमोह जनपद पंचायत की **ग्राम पंचायत उमरी** में सरकारी पैसों से ‘ठंडी हवा’ खाने का एक अनोखा और दिलचस्प घोटाला सामने आया है। पंचायत भवन को ठंडा करने के लिए कागजों पर तो कूलर खरीद लिया गया और उसका सरकारी भुगतान (बिल) भी ठिकाने लगा दिया गया, लेकिन हकीकत यह है कि पंचायत भवन की दीवारें आज भी उमस से उबल रही हैं और वहां कूलर का नामोनिशान तक नहीं है।

अब ग्रामीण जनता और सजग नागरिक यह यक्ष प्रश्न पूछ रहे हैं कि—कागजों पर आया यह सरकारी कूलर आखिर किसकी ‘निजी’ हवा बन चुका है ? सरपंच के घर चल रहा है, सचिव के बंगले की शोभा बढ़ा रहा है या फिर जनपद सीईओ साहब की सेवा में पहुंच गया है?”*

बालाजी मार्केटिंग का बिल पास, पर धरातल पर सब ‘खास’

अखबार की खोजी पड़ताल में सामने आया है कि ग्राम पंचायत उमरी में सरकारी राशि का आहरण (Withdrawal) करने के लिए *’बालाजी मार्केटिंग’** नाम की फर्म का एक मोटा बिल लगाया गया। यह बिल पंचायत भवन के लिए कूलर की खरीदी का था।

* रिकॉर्ड के अनुसार, बिल लगते ही पूरी मुस्तैदी के साथ राशि का भुगतान भी कर दिया गया।
* लेकिन जब ग्रामीणों ने पंचायत भवन का दौरा किया, तो वहां केवल खाली कोने और धूल फांकती दीवारें नजर आईं।
* भीषण तपिश के बीच पंचायत काम से आने वाले ग्रामीणों को पसीने से लथपथ होना पड़ रहा है, जबकि सरकारी दस्तावेजों में उमरी पंचायत ‘कूल-कूल’ हो चुकी है।

सरपंच, सचिव और जनपद की ‘त्रिमूर्ति’ पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि बिना सामग्री की डिलेवरी (आपूर्ति) सुनिश्चित किए, बालाजी मार्केटिंग के बिल को पास कैसे कर दिया गया?

चर्चाओं का बाजार गर्म है कि यह कूलर पंचायत भवन के लिए खरीदा ही नहीं गया था, बल्कि इसे सीधे रसूखदारों के घरों में शिफ्ट कर दिया गया है। जनता के पैसों से खरीदी गई सरकारी संपत्ति का यह निजी इस्तेमाल प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत का एक बड़ा उदाहरण है।

पूर्व में भी लगे हे फर्जीवाड़े के आरोप

दमोह जनपद में मनरेगा और सामग्री खरीदी में फर्जीवाड़े के मामले लगातार सुर्खियों में हैं (कुछ दिनों पहले ही हरदुआ मुडर पंचायत में मनरेगा की धज्जियां उड़ने का मामला सामने आया था)। इसके बावजूद, जनपद पंचायत के आला अधिकारी और सीईओ पंचायतों के खातों से हो रहे इस तरह के संदिग्ध भुगतानों की मॉनिटरिंग नहीं कर रहे हैं। भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किए बिना ही पंचायतों की फाइलों को ‘ओके’ कर दिया जाता है।

अखबार के तीखे सवाल

1. जब उमरी पंचायत भवन में कूलर पहुंचा ही नहीं, तो सचिव और सरपंच ने किस आधार पर भुगतान वाउचर पर दस्तखत किए?
2. क्या ‘बालाजी मार्केटिंग’ फर्म की भूमिका की भी जांच होगी, जो बिना सामग्री दिए केवल बिलों का खेल खेल रही है?
3. जनपद सीईओ साहब, क्या आपकी नाक के नीचे चल रहे इस ‘कूलर खेल’ की भनक आपको वाकई नहीं है?

Shabd Agni
Author: Shabd Agni

.

विज्ञापन
लाइव क्रिकेट स्कोर