सुबह गांव में तालाब, शाम को बांदकपुर धाम पहुंच गया काम!
शब्द अग्नि अनुराग बजाज
दमोह जिले में पंचायत और मनरेगा विभाग के भीतर इन दिनों ऐसा खेल चल रहा है, जिसने सरकारी व्यवस्थाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मजदूर गांव में काम कर रहे हैं, लेकिन मनरेगा पोर्टल पर उसी काम की लोकेशन कभी किसी और पंचायत में तो कभी दूसरे जनपद में दिखाई जा रही है। सरकारी रिकॉर्ड में चल रही यह “लोकेशन लीला” अब महज तकनीकी गलती नहीं, बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार की बू देने लगी है।
सबसे ताजा मामला दमोह जनपद पंचायत की हरदुआ मुडर ग्राम पंचायत का सामने आया है। यहां मनरेगा से खेत तालाब निर्माण कार्य कराया जा रहा था। सुबह तक मस्टर रोल में कार्य की लोकेशन गांव के पास दर्ज थी, लेकिन शाम होते-होते वही काम बांदकपुर धाम के आसपास पहुंच गया। सवाल यह है कि क्या कुछ घंटों में तालाब भी यात्रा पर निकल पड़ा था, या फिर पोर्टल पर बैठा कोई खेल कर रहा था?
एक ही निर्माण कार्य की अलग-अलग लोकेशन दर्ज होना सीधे तौर पर सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ का संकेत देता है। इससे न सिर्फ वास्तविक कार्यस्थल छिपाया जा सकता है, बल्कि फर्जी मजदूर, फर्जी भुगतान और कागजी निर्माण को भी आसानी से वैध बनाया जा सकता है।
ऐसा नहीं है कि यह पहला मामला हो। तेंदूखेड़ा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत बिसनाखेड़ी में मनरेगा से मेड़े वाली तलैया के जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा था, लेकिन मस्टर रोल में उसकी लोकेशन हटा जनपद की ग्राम पंचायत सोजना के पास दर्ज कर दी गई। यानी काम कहीं और, रिकॉर्ड कहीं और।
इसी तरह दमोह जनपद की ग्राम पंचायत मुंडारी में बोल्डर चेक निर्माण कार्य खकरी क्षेत्र में होना बताया गया, लेकिन मस्टर रोल पर दिखाई गई लोकेशन मुंडारी से लगभग 60 किलोमीटर दूर की निकली। अब सवाल यह उठता है कि मजदूर आखिर काम करने कहां गए थे और भुगतान किस आधार पर किया गया?
मनरेगा जैसी योजना, जो ग्रामीण गरीबों को रोजगार और गांवों को विकास देने के उद्देश्य से बनाई गई थी, वह दमोह में अफसरों और पंचायत तंत्र के लिए कमाई का जरिया बनती दिखाई दे रही है। सबसे गंभीर बात यह है कि मस्टर रोल और लोकेशन को पास करने की जिम्मेदारी जनपद पंचायत के अतिरिक्त परियोजना अधिकारी की होती है। बिना उनकी मंजूरी के यह खेल संभव नहीं माना जा सकता।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े स्तर पर लोकेशन गड़बड़ी सामने आने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह केवल लापरवाही है, या फिर पूरा सिस्टम सांठगांठ और लेनदेन के सहारे चल रहा है?
यदि एक ही कार्य की लोकेशन दिन में कई बार बदल रही है, तो यह केवल तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला है। जरूरत है कि पूरे जिले के मनरेगा कार्यों की स्वतंत्र जांच कराई जाए, मस्टर रोल और जीपीएस लोकेशन का मिलान कराया जाए और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
वरना मनरेगा पोर्टल पर चलता यह लोकेशन गेम गरीब मजदूरों के हक और सरकारी खजाने दोनों को लूटता रहेगा।
Author: Shabd Agni
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