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June 10, 2026 12:10 am

दमोह : सरपंच-सचिवों का कलेक्ट्रेट में हल्लाबोल

एडीएम को सौंपा ज्ञापन; कहा– ‘नेटवर्क नहीं मिलने से हो रही विसंगतियां’

शब्द अग्नि / ब्यूरो अनुराग बजाज

बड़ी मांग: कमजोर नेटवर्क वाले ग्रामीण क्षेत्रों में ऑफलाइन उपस्थिति और मैनुअल मस्टर रोल को दी जाए मान्यता, मांगें पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी**

दमोह। जिले की ग्राम पंचायतों में मनरेगा और अन्य विकास कार्यों के क्रियान्वयन को लेकर चल रहे घमासान के बीच सोमवार को एक नया मोड़ सामने आया है। एक तरफ जहां पिछले कुछ दिनों से पंचायतों में ‘जियो-लोकेशन’ और मस्टर रोल में गड़बड़ी के मामले सुर्खियों में हैं, वहीं दूसरी तरफ अब मध्य प्रदेश पंचायत सरपंच, सचिव व सहायक सचिव संगठन ने एकजुट होकर मोर्चा खोल दिया है।

संगठन के बैनर तले भारी संख्या में पहुंचे जनपद स्तरीय जनप्रतिनिधियों और शासकीय अमले ने अपनी ज्वलंत व्यावहारिक व तकनीकी समस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने जनपद सीईओ के माध्यम से नारेबाजी करते हुए एडीएम मीना मसराम को ज्ञापन सौंपा और बाद में कलेक्टर प्रताप नारायण यादव से मुलाकात कर अपनी पीड़ा व्यक्त की।

‘NMMS ऐप’ और कमजोर नेटवर्क बना सबसे बड़ी मुसीबत
सरपंच, सचिव और रोजगार सहायकों ने संयुक्त रूप से बताया कि ग्रामीण विकास के दावों के बीच धरातल पर गंभीर तकनीकी विसंगतियां आ रही हैं।

ऑनलाइन हाजिरी की मार: संगठन का कहना है कि सरकार द्वारा लागू किए गए एनएमएमएस (NMMS) मोबाइल ऐप के कारण ग्रामीण अंचलों में काम करना मुश्किल हो गया है। कमजोर नेटवर्क और टावर न होने की वजह से मजदूरों की ऑनलाइन उपस्थिति समय पर दर्ज नहीं हो पाती है।

केवाईसी की समस्या: एक-एक मजदूर की केवाईसी (KYC) अपडेट न होने से हाजिरी रिजेक्ट हो जाती है।

ऑफलाइन की मांग: संगठन ने प्रमुखता से मांग की है कि नेटवर्क विहीन और सुदूर पहाड़ी क्षेत्रों में ऑनलाइन के बजाय ऑफलाइन उपस्थिति दर्ज करने तथा मैनुअल मस्टर रोल को अधिकारिक मान्यता दी जाए, ताकि विकास कार्य प्रभावित न हों।

सामग्री भुगतान और फर्जी सीएम हेल्पलाइन पर जताई नाराजगी : 
ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने केवल हाजिरी ही नहीं, बल्कि पंचायतों की अन्य वित्तीय व प्रशासनिक समस्याओं की लंबी फेहरिस्त भी अफसरों के सामने रखी:
1. **सामग्री का पेंडिंग भुगतान:** पंचायतों में निर्माण कार्य करा लिए गए हैं, लेकिन वेंडरों और सामग्री का भुगतान लंबे समय से अटका हुआ है।
2. **टारगेट आधारित मनरेगा का विरोध:** शासन द्वारा मनरेगा में थोपे जा रहे टारगेट आधारित सिस्टम का विरोध किया गया।
3. **फर्जी 181 शिकायतें:** पंचायत प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि सीएम हेल्पलाइन (181) पर दुर्भावनापूर्ण तरीके से फर्जी शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं, जिन पर बिना पंचायत प्रतिवेदन (जांच) के एकतरफा कार्रवाई की जाती है। इस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए।

प्रदर्शन में ये रहे मौजूद
इस व्यापक प्रदर्शन में सरपंच संघ के अध्यक्ष महेश उपाध्याय, शंकर गौतम, कुम्हारी उपाध्यक्ष श्रीमती रश्मि यादव, हथना सरपंच गुड्डू परशुराम मिश्रा, मोनू विश्वकर्मा, बबीता साहू, जयपाल यादव शामिल हुए। इसके साथ ही जनपद सरपंच संघ अध्यक्ष (अभाना) गोविंद सिंह, अशोक प्रजापति, नारायण कुशवाहा, सचिव संघ से दिलीप पाठक, रोजगार सचिव वीर सिंह, भारत सिंह, देवेंद्र सिंह (भीलमपुर), इंद्राणी पटेल, अजय सिंह (इमलिया), देवीराय आनू, रीकेश चौबे, सचिन साहू (घाटपिपरिया), राजकुमार यादव, दर्शन सिंह, हीरा सिंह, नरेश राय, पवन राय, भारत जैन और मन्नू राजा सहित सैकड़ों की संख्या में पंचायत कर्मी उपस्थित रहे

निराकरण न होने पर उग्र आंदोलन का अल्टीमेटम:

कलेक्ट्रेट पहुंचे संगठन के पदाधिकारियों ने दो टूक शब्दों में जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए इन न्यायसंगत मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए। यदि इन गंभीर और व्यावहारिक विसंगतियों का शीघ्र निराकरण नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में सामूहिक काम बंद कर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

अखबार के तीखे सवाल:
1. क्या शासन डिजिटल इंडिया के नाम पर बिना नेटवर्क वाले सुदूर गांवों में ऑनलाइन सिस्टम थोपकर आदिवासियों और गरीबों का रोजगार छीन रहा है?
2. एक तरफ ऐप पर गलत लोकेशन के मामले सामने आ रहे हैं, तो क्या वाकई इसके पीछे कमजोर नेटवर्क की विसंगति है या फिर कोई और खेल?
3. महीनों से पेंडिंग पड़े सामग्री भुगतान के कारण पंचायतों में ठप पड़े विकास कार्यों का जिम्मेदार आखिर कौन है?

Shabd Agni
Author: Shabd Agni

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